कविता — 6 हमारे पूर्वज बड़े महान थे हृदय देश में जिसकी देवगण उतारते हैं आरती। गीत जिसके शूरपुत्रों के गाती रही है मां भारती।। देवत्वाभिलाषी जहां सेवन करें सदा इष्ट कर्म का। काममय यह जीव भी सेवन करे निज धर्म का।। 1 ।। यथाकारी तथाकारी तथा भवति – यह सिद्धांत है। जिसने लिया है […]
हमारे पूर्वज बड़े महान थे