आत्म व्यवहार के अनुरूप परिणाम जब पतन वैचारिक होता है तो गिरता जाता मानव दल । जब उत्थान वैचारिक होता है तो बढ़ता जाता मानव दल।। ऐश्वर्याभिलाषी जीव सदा यहाँ , ऐश्वर्य हेतु ही आता। बलवीर्ययुक्त समर्थ जीवन को कोई बड़भागी ही पाता।। समझो ! हीनवीर्य हो जाना अपनी मृत्यु को है आमंत्रण । देना […]