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कृषि जगत

अन्नदाता किसानों को समर्पित डॉ सत्यवान सौरभ की नई किताब ‘खेती किसानी और पशुपालन’

दोहे, कहानी, कविता, संपादकीय लिखने वाले डॉ सत्यवान सौरभ का जन्म बड़वा भिवानी हरियाणा में हुआ। ये वर्तमान दौर के युवा स्वतंत्र पत्रकार हैं तथा आकाशवाणी और टीवी पेनालिस्ट है। इसलिए उनकी रचनाएं सामयिक घटनाओं व प्रसंगों से प्रेरित होती हैं तथा उनकी रचनाएं देश भर के अखबारों में में प्रतिदिन अनिवार्य उपस्थिति रहती है। […]

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राजनीति

वोट बटोरने का शॉर्टकट ‘रेवड़ी की राजनीति’

मुफ्तखोरी की संस्कृति इतने खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है कि कुछ राजनीतिक दलों का अधिकांश चुनावी एजेंडा, एक सोची-समझी रणनीति के तहत केवल मुफ्त की पेशकशों पर आधारित है, जो मतदाताओं को स्पष्ट रूप से एक संदेश भेज रहा है कि यदि राजनीतिक दल जीतता है तो उन्हें ढेर सारी मुफ्त चीजें मिलेंगी। इससे […]

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महत्वपूर्ण लेख

राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग

स्वतंत्र, कानून का पालन करने वाले संस्थान आवश्यक जांच और संतुलन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मजबूत और लचीले लोकतंत्रों के लिए अंतिम आधार प्रदान करते हैं। हाल ही में, भारत में समाज के कमजोर वर्गों द्वारा विरोध की कई घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा, असहमति के दमन की प्रकृति कानून प्रवर्तन […]

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इतिहास के पन्नों से

बड़वा में हैं अंग्रेजों के जमाने की शानदार चीजें

(गगनचुंबी हवेलियां, मनमोहक चित्रकारी, कुंड रुपी जलाशय, हाथीखाने, खजाना गृह, कवच रुपी मुख्य ठोस द्वार और न जाने क्या-क्या) — डॉo सत्यवान सौरभ, दक्षिण-पश्चिम हरियाणा में शुष्क ग्रामीण इलाकों का विशाल विस्तार है, जो उत्तरी राजस्थान के रेतीले क्षेत्रों से सटे हुए है, यहाँ बड़वा नामक एक समृद्ध गांव स्थित है। यह राजगढ़-बीकानेर राज्य राजमार्ग […]

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कविता

उड़े तिरंगा बीच नभ

आज तिरंगा शान है, आन, बान, सम्मान। रखने ऊँचा यूँ इसे, हुए बहुत बलिदान।। नहीं तिरंगा झुक सके, नित करना संधान। इसकी रक्षा के लिए, करना है बलिदान।। देश प्रेम वो प्रेम है, खींचे अपनी ओर। उड़े तिरंगा बीच नभ, उठती खूब हिलोर।। शान तिरंगा की रहे, दिल में लो ये ठान। हर घर, हर […]

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पर्व – त्यौहार

अमृत महोत्सव के जश्न में, कहाँ खड़े हैं आज हम?

(विश्व की उदीयमान प्रबल शक्ति के बावजूद भारत अक्सर वैचारिक ऊहापोह में घिरा रहता है. यही कारण है कि देश के उज्ज्वल भविष्य और वास्तविकता में अंतर दिखाई देता है. हालांकि भारत महाशक्ति बनने की प्रक्रिया में प्रमुख बिंदुओं पर खरा उतरता है, लेकिन व्यापक अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में घरेलू मुद्दों के कारण वह कमजोर पड़ […]

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पर्यावरण

प्रकृति संरक्षण: हमारे समाधान प्रकृति में हैं

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है ताकि यह पहचाना जा सके कि एक स्वस्थ पर्यावरण एक स्थिर और उत्पादक समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नींव है। प्रकृति है तो जीवन है, जीवन है तो मानव है, मानव है तो मानवता है। प्रकृति संरक्षण सबसे बड़ा पुण्य […]

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समाज

बुजुर्ग हमारे वजूद हैं न कि बोझ

(बदलते परिवेश में एकल परिवार बुजुर्गों को घर  की  दहलीज से दूर कर रहें है. बच्चों को दादी- नानी  की  कहानी की बजाय पबजी अच्छा लगने लगा है, बुजुर्ग अपने बच्चों से बातों को तरस गए है. वो  घर के किसी कोने में अकेलेपन का शिकार हो रहें है. ऐसे में इनकी मानसिक-आर्थिक-सामाजिक समस्याएं बढ़ती जा रही […]

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महत्वपूर्ण लेख

भारत को नए साल में नए सिद्धांत और क्षमता की है आवश्यकता

(चीन एक बढ़ती और आक्रामक महाशक्ति भारत के लिए बड़ा रणनीतिक खतरा है और पाकिस्तान के साथ चीन के कंटेनर भारत की रणनीति के लिए खतरा है। इसे देखते हुए, भारत के लिए दो-मोर्चे के खतरे के लिए तैयार रहना समझदारी होगी। ) वर्ष 2020 तक चल रहे कोरोनावायरस महामारी के कारण कई मोर्चों पर […]

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मुद्दा

खबरों के पीछे बेतहाशा दौड़ती पत्रकारिता

( किसी भी मीडिया संस्थान की पहली खबर से अगर लोगों के चेहरे पर मुस्कान न आये तो वह कैसी पत्रकारिता ? आज देश भर के चैनलों और अख़बारों में खबर जहां जल्दी पहुंचाने पर जोर है, वहीं समाचार में वस्‍तुनिष्‍ठता, निष्पक्षता और सटीकता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसे […]

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