कठिनाइयों का दौर और राणा अजय सिंह हम यहां पर यह भी स्पष्ट करना चाहेंगे कि कैलवाड़ा अरावली पर्वत पर बसा हुआ एक नगर है। इस नगर में राणा अजय सिंह अपने दुर्दिनों के उस दौर को काट रहा था। वह उस समय किसी से भी किसी प्रकार की शत्रुता मोल लेने की स्थिति में […]
Category: इतिहास के पन्नों से
Dr DK Garg Note -यह आलेख महात्मा बुद्ध के प्रारम्भिक उपदेशों पर आधारित है। ।और विभिन्न विद्वानों के विचार उपरांत है। ये 9 भाग में है। इसको पढ़कर वे पाठक विस्मय का अनुभव कर सकते हैं जिन्होंने केवल परवर्ती बौद्ध मतानुयायी लेखकों की रचनाओं पर आधारित बौद्ध मत के विवरण को पढ़ा है । कृपया […]
राजा अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई.) मेवाड़ की भूमि की महानता इसके बलिदानों में है। यही कारण है कि भारत में जब बलिदानों की बात चलती है तो मेवाड़ का नाम सबसे पहले लिया जाता है। भारत की वीर परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में सचमुच मेवाड़ की वीरभूमि का सबसे महत्वपूर्ण योगदान […]
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शिवेश प्रताप तुलसीदास जी सनातन धर्मावलम्बियों के अभिभावक के रूप में सबको शिक्षा देते हुए कभी प्रेम से पुचकारते तो कभी कठोरता से डांटते दिखते हैं। केवल दलित या गैर ब्राह्मण जाति को रेखांकित कर तुलसीदास जी को लक्ष्य करना जातिवादी भेड़ियों द्वारा राजनैतिक जठराग्नि को शांत करने का कुचक्र प्रतीत होता है। अपनी बात […]
राणा रतन सिंह का बलिदान और मेवाड़ के प्रजाजन भारत के रोमांचकारी इतिहास का यह एक गौरवशाली प्रमाण है कि यहां के वीर वीरांगनाओं ने अपने देश के स्वाभिमान के लिए अपना प्राणोत्सर्ग करने में तनिक भी विलंब नहीं किया। देशभक्त वीर वीरांगनाओं ने सदा देश के मान सम्मान को आगे रखा और बड़े स्वार्थ […]
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डॉ घनश्याम बादल आज भारत अपना चौहतरवां गणतंत्र दिवस मना रहा है और इतिहासकार दावा करते हैं कि भारत ही विश्व में गणराज्य का जनक है कुछ लोग गणराज्य को शिवजी के गणों से जोड़कर देखते हैं तो कुछ लोग गणेश जी से कुछ का मानना है कि यहां बौद्ध काल एवं उससे भी पहले […]
राणा रतन सिंह पहुंचे युद्ध क्षेत्र में राणा भीमसिंह के युद्घ में जाने का अभिप्राय था कि आज का सूर्य या तो चित्तौड़गढ़ के पतन को देखेगा या फिर उसके उत्कर्ष को अपने अंक में समाकर अगले दिन के सूर्योदय को इस प्रसन्नतादायक समाचार के साथ सौंप देगा कि भारत की भूमि वीर सपूतों की […]