पंजाब में यह पहला बवाल नही है।देश आजाद होने केतुरन्त बाद भी यह हुआ था।सरदार पटेल जैसे दूरदर्शी ने इसे दबा दिया।तब यें अलग खालिस्तान का सपना पूरा नही टर सके।धीरे धीरे लक्ष्य की ओर बढे।हिन्दी समाप्त की।आर्यसममाज ने स्वामी आत्मानन्द जी और ओमानन्द जी के नेतृत्व में संघर्ष किया।लोगों ने बलिदान दिया। आन्दोलन कुछ […]