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इतिहास के पन्नों से

योगीराज श्री कृष्ण जी की इतनी फजीहत क्यों?

आर्यावर्त देश (भारत )के महान योगीराज श्री कृष्ण भगवान जी को विधर्मीयों द्वारा
माखन चोर स्त्रियों के कपड़ा चोर चूड़ी बेचने वाले रासरसिया आदि भिन्न-भिन्न तरीकों से बदनाम किया जाता रहा है जिन की एकमात्र पत्नी रुकमणी थी तथा जिनके एकमात्र पुत्र प्रदुम था


जिस योगी ने गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की तथा 16000 वैदिक रिचा कंठस्थ हो जिसने कर्मकांड मानव उत्थान के लिए वैदिक सिद्धांत अनुसार गीता जैसे महान ग्रंथ को दिया हो चीरहरण करने वाले तथा विधर्मी यों का लोगों का नाश किया हो
ऐसे योगीराज कृष्ण भगवान एवं अन्य महापुरुषों को भ्रमित तरीके से विधर्मीओं द्वारा भिन्न-भिन्न तरीकों से बदनाम किया जाता है जो निंदनीय एवं अपराध की श्रेणी में आता है
जिसका महर्षि दयानंद सरस्वती तथा उनके द्वारा बनाई संस्था आर्य समाज एकमात्र ऐसा संगठन है जो भारत के महापुरुषों के वास्तविक इतिहास तथा ढोंग पाखंड अंधविश्वास सामाजिक कुरीतियों का दूर करने के प्रयास में लगा हुआ है
अभी कुछ समय पूर्व कथावाचक मुरारी बापू आदि कथावाचकओ ने महापुरुषों को नाना तरीके से बदनाम करना शुरू किया तथा महापुरुषों पर अभद्र टिप्पणी की
” जिसका हिंदुत्ववादी किसी भी संगठन ने विरोध तक नहीं किया”
” जिसका आर्य समाज के विद्वानों तथा आर्य समाज ने पूर्णता से वेदिक सिद्धांत अनुसार शास्त्रार्थ करने की करने की चुनौती दी
अर्थात उन विधर्मी कथावाचकओ को योगीराज कृष्ण भगवान एवं अन्य महापुरुषों पर की गई अभद्र टिप्पणी को वापस लेना पड़ा तथा माफी मांगनी पड़ी
ऐसे महर्षि दयानंद सरस्वती के अनुयायियों आर्य विद्वानों को आर्य समाज को कोटि-कोटि नमन वंदन अभिनंदन
प्रस्तुति – डॉ जगदीश प्रताप सिंह आर्य
पूर्व सांसद प्रतिनिधि

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