स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में मानवाधिकारवादी संगठन भी खड़े हुए हैं। भारत में एक मानवाधिकार आयोग भी गठित किया गया है। लोकतांत्रिक देशों में यह एक स्वस्थ परंपरा है कि लोगों के अधिकार दिलाने और समझाने के लिए एक आयोग गठित किया जाए। किंतु इस प्रकार के मानवाधिकार आयोग के गठन से पूर्व इस […]
Category: डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से
सन् 2000 में बिहार में ही राज्यपाल विनोद चंद्र पांडेय ने अति उत्साह का परिचय देते हुए नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। बाद में विधायकों का जुगाड़ पूरा न होने पर सत्ता की सुंदरी ने नीतीश कुमार को ठेंगा दिखा दिया और पुन: राबड़ी ही ‘रबड़ी’ का स्वाद चखने लगीं। राज्यपाल का […]
राजस्थान के राजभवन की घटना इसके पश्चात दूसरी बार लोकतंत्र की हत्या का यह ढंग राजस्थान के राजभवन में सन् 1967 में दोहराया गया। उस समय राजस्थान के राज्यपाल डा. संपूर्णानंद थे। उनके समय में राजस्थान में यह स्थिति आयी कि चुनावों में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत से कुछ पीछे रह गयी। तब ऐसी परिस्थितियों में […]
केन्द्र में राष्ट्रपति और प्रांतों में राज्यपाल के पद का सृजन हमारे संविधान निर्माताओं ने इस भावना से किया था कि ये दोनों पद राजनीति की कीचड़ से ऊपर रहेंगे। राजनीति राजभवन से बाहर रहेगी। राजभवन से राजनीति कभी नहीं की जाएगी। राजभवन एक न्याय मंदिर होगा। जिसकी ओर सभी की दृष्टि न्याय पाने की […]
देश को आजाद हुए 70 वर्ष हो गये, पर दुर्भाग्य है हमारा कि आज भी हमारे देश में लगाया पैंतीस हजार वही कानून लागू हैं, जो अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के दौरान लागू किये गये थे। कानूनी प्रक्रिया भी वही है, जो अंग्रेजों ने यहां चलायी थी। अंग्रेजों की न्यायप्रणाली में दोष होना स्वाभाविक है […]
अवधूत दत्तात्रेय हर क्षण किसी से ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्पर रहा करते थे। वह पशु-पक्षियों एवं कीट पतंगों की गतिविधियों को बड़े ध्यान से देखा करते और विवेचना कर उनसे शिक्षा प्राप्त किया करते थे। दत्तात्रेय अक्सर कहा करते थे कि ”जिनसे मैं कोई भी शिक्षा लेता हूं वे मेरे गुरू हैं।” एक […]
इन नेताओं को कौन समझाये कि भारत में आतंकवाद की समस्या का मूल कारण अगर ‘अशिक्षा’ और बेरोजगारी होती तो भारत में क्रांति होती। सारे भूखे और बेरोजगार अशिक्षित संसद की ओर कूच करते, हमारे राजभवनों को आग लगाते, बैंक खातों में जमा धनराशि का हिसाब लेते और अपने अधिकारों का सम्मान करने वाले लोगों […]
पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी अपने ‘हठीले’ स्वभाव के कारण चर्चा में बनी रहती हैं। हठीले व्यक्ति के विषय में यह सर्वमान्य सत्य होता है कि वह विवेकहीन होता है, वह स्वार्थी होता है और अपने ‘स्वार्थ’ के सामने उसे और कुछ भी नहीं दिखता है। कहने के लिए वह स्वयं या उसके समर्थक […]
भारत लोकतंत्र की जन्मस्थली है। आज का ब्रिटेन और अमेरीका तो भारत के लोकतंत्र की परछाईं मात्र भी नहीं है। हमारे ‘शतपथ ब्राह्मणादि ग्रंथों’ में राजनीतिशास्त्रियों के लिए कई बातें अनुकरणीय रूप से उपलब्ध हैं। ‘शतपथ ब्राह्मण’ में राजकीय परिवार के लोगों के राजनीतिक अनुभवों से देश को लाभान्वित करने के उद्देश्य से इस परिवार […]
भारत की सेना का इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण है और इसका कारण यह है कि भारत ही विश्व का वह प्राचीनतम और पहला देश है जिसने जीवन को उन्नति में ढालने के लिए सर्वप्रथम सैन्य विज्ञान की उत्कृष्टतम खोज की। शेष विश्व तो यह आज तक भी समझ नहीं पाया कि सैन्य विज्ञान क्या होता है? […]