Categories
डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से भयानक राजनीतिक षडयंत्र राजनीति

लोकतंत्र के हत्यारे बने राजभवन

केन्द्र में राष्ट्रपति और प्रांतों में राज्यपाल के पद का सृजन हमारे संविधान निर्माताओं ने इस भावना से किया था कि ये दोनों पद राजनीति की कीचड़ से ऊपर रहेंगे। राजनीति राजभवन से बाहर रहेगी। राजभवन से राजनीति कभी नहीं की जाएगी। राजभवन एक न्याय मंदिर होगा। जिसकी ओर सभी की दृष्टि न्याय पाने की आशा के साथ उठेगी। जब-जब राजनीतिक संकीर्णताओं में फंसकर लोकतंत्र का गला घोंटने का कुत्सित कृत्य किया जाएगा तब-तब ऐसे कृत्य करने वालों से लोकतंत्र की प्राणरक्षा राजभवन के द्वारा सुनिश्चित होगी। जब-जब राजनीति के भंवर जाल में फंसकर लोकतंत्र की नाव किसी राज्य में हिचकोले खाएगी तब-तब राजभवन उस डूबती नैया की पतवार बनेगा। ऐसी अपेक्षाओं से हमारे संविधान निर्माताओं ने राज्यपाल के पद का सृजन किया था। यह राष्ट्र का दुर्भाग्य रहा कि राज्यपाल प्रांतों में कितनी ही बार राष्ट्र के अपयश का कारण बने हैं। राज्यपाल एक निष्पक्ष पिता की सी भूमिका नहीं निभा पाए। जिससे लोकतंत्र और लोकतंत्र की भावना, संविधान और संविधान की भावना, राष्ट्र और राष्ट्र की आत्मा सभी आहत हुए हैं। इसलिए एक बार नहीं, कितनी ही बार राज्यों में राज्यपाल के पद को समाप्त करने की मांग देश के बुद्घिजीवी वर्ग की ओर से हुई है।
फरवरी सन 2005 ई. में जिन राज्यों में चुनाव हुए थे-उनमें से हरियाणा की जनता का निर्णय एकदम स्पष्ट आया और वहां पर ‘इनेलो’ के ओमप्रकाश चौटाला की सरकार को परिवर्तित कर सत्ता वहां की जनता ने कांग्रेस के हाथों में सौंप दी। किंतु बिहार की जनता ने जो आदेश दिया था-वह खंडित जनादेश कहा गया, क्योंकि सत्ता किसी भी दल को नहीं मिल सकी थी। इसी प्रकार झारखण्ड की जनता ने जो निर्णय दिया था-वह भी किसी राजनीतिक दल या गठबंधन को सत्ता तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं था। किंतु कुछ-कुछ स्पष्ट अवश्य था कि जनता पुन: अर्जुन मुण्डा को मुख्यमंत्री देखना चाहती थी। इस असमंजस की स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने में वहां का राजभवन सक्रिय हो गया। सारी राजनीति राजभवन से संचालित होने लगी। जब निर्णय आया तो राजभवन का कुत्सित स्वरूप स्पष्ट हो गया।
पता चला कि राज्यपाल महोदय ने लोकतंत्र की हत्या कर जो निर्णय लिया, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उसे ध्वस्त कर दिया। माननीय न्यायालय ने समय पर हस्तक्षेप करते हुए लोकतंत्र के हत्यारों के मुंह में से लोकतंत्र के ‘मेमने’ को खींच लिया। लोकतंत्र की रक्षा हुई और ‘अर्जुन मुण्डा’ पुन: झारखण्ड के मुख्यमंत्री बन गये।
यह इस देश में पहला अवसर नहीं है जब लोकतंत्र को राजभवनों ने इस प्रकार आहत किया है- इससे पूर्व भी ऐसी घटनाएं कई बार हुई हैं। कुछ उदाहरण यहां प्रस्तुत किये जा रहे हैं। सन 1952 की बात है। तब भारत में पहले आम चुनाव हुए थे, तब भारत में लोकतंत्र नाम का शिशु भी मात्र पांच वर्ष का ही था। इसे न बोलना आता था और न ढंग से चलना आता था। नेहरू जी और डा. राजेन्द्र प्रसाद तब इसका पालन-पोषण कर रहे थे। ठीक उसी समय तमिलनाडु के राजभवन में जो राज्यपाल महोदय बैठे थे-उनके मन में इस शिशु के प्रति न तो कोई सहानुभूति थी और न ही कोई दयाभाव था।
तमिलनाडु राज्यपाल की घटना
राज्यपाल ‘श्रीप्रकाश’ ने सन् 1952 में ‘यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट’ को मिली सत्ता छीनकर पार्टी प्रेम में सी. राजगोपालाचारी को मुख्यमंत्री बना दिया था। सी. राजगोपालाचारी उस समय किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे, तो राज्यपाल ने सारे नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर उन्हें विधान परिषद का सदस्य भी मनोनीत कर दिया।
लोकतांत्रिक ढंग से उस समय यह पद यूनाइटेड फ्रंट के ‘टी. प्रकाशम्’ को मिलना चाहिए था, जिनके भाग्य को राजभवन की राजनीति लील गयी। राजभवन में लोकतंत्र की हत्या की यह पहली घटना थी। जिसने उस समय के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी हिला कर रख दिया था। इस एक घटना ने स्पष्ट कर दिया था कि राज्यपाल राजनीति से ऊपर उठकर नहीं देख पाएंगे और अपने राजनीतिक हितों और दलगत स्वार्थों को प्राथमिकता देकर वे लोकतंत्र की हत्या करने में देर नहीं करेंंगे। अच्छा होता कि हम इस घटना कुछ शिक्षा लेते, परंतु शिक्षा ली नहीं गयी।
(लेखक की पुस्तक ‘वर्तमान भारत में भयानक राजनीतिक षडय़ंत्र : दोषी कौन?’ से)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
grandpashabet giriş
klasbahis giriş
klasbahis
holiganbet güncel
imajbet güncel
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
holiganbet güncel giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş