दिनेश चमोला ‘शैलेश’ उपदेश देना जितना सरल है, आचरण करना उतना ही कठिन है। कोई भी बात कहने व सुनने में जितनी सहज दिखाई व सुनाई देती है, वह भी व्यवहार के धरातल पर उतनी सहज नहीं होती। प्रायः बड़े-बुजुर्ग तथा तथाकथित श्रेष्ठजन को, अपने से छोटों को, यह कहते हुए सुना जाता है कि […]