Categories
आज का चिंतन

संसार स्वार्थी है, यहां के लोग स्वार्थवश ही एक दूसरे से मित्रता करते हैं : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

*संसार स्वार्थी हैं। यदि कोई आज आपको आपकी किसी विशेषता के कारण चाहता है, तो यह न समझें, कि आज से 10 वर्ष बाद भी या हमेशा ही वह आपको ऐसे ही चाहेगा। * संसार में अपवाद रूप कुछ ही लोग ऐसे होते हैं, जो अपने लौकिक स्वार्थ को छोड़कर, अपने अविद्या राग द्वेष आदि […]

Categories
आज का चिंतन

कोरोना काल में मानवता एक पल में ही रसातल में पहुंच गई

शमीम शर्मा चीन के धर्मगुरु कन्फ्यूशियस ने अपने शिष्यों से पूछा कि ऐसा कौन-सा काम है जो एक क्षण में किया जा सकता है। शिष्यों ने खूब सोचा कि एक पल में क्या हो सकता है पर सभी निरुत्तर रहे। आखिर धर्मगुरु ने ही जवाब दिया कि एक पल में गिरा जा सकता है। कोरोना […]

Categories
आज का चिंतन

हे मनुष्य जुआ मत खेल ! खेती कर !!

  #डॉविवेकआर्य महाभारत में द्रौपदी चीर-हरण का प्रसारण हुआ। हम महाभारत के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद आदि का अवलोकन करते हैं, तो युधिष्ठिर एक बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में प्रतीत होते हैं। जब महाभारत में उन्हें जुआ खेलता पाते हैं, तो एक बुद्धिमान व्यक्ति को एक ऐसे दोष से ग्रसित पाते हैं जिसने न जाने कितने परिवारों […]

Categories
आज का चिंतन

मन के मंदिर में रोज झाड़ू लगाओ : स्वामी विवेकानंद परिव्राजक

*जैसे आपका भोजन आपको स्वयं ही खाना पड़ता है, तभी भूख मिटती और शक्ति प्राप्त होती है। इसी प्रकार से आपको अपने मन में स्वयं झाड़ू लगानी होगी, तभी उससे मन की शुद्धता और प्रसन्नता प्राप्त होगी। कुल मिलाकर चार प्रकार का ज्ञान होता है। मिथ्या ज्ञान, संशयात्मक ज्ञान, शाब्दिक ज्ञान, और तत्त्वज्ञान। 1- मिथ्या […]

Categories
आज का चिंतन

ईश्वर का सत्य स्वरूप हमें ऋषि दयानंद के ग्रंथों से प्राप्त होता है

ओ३म् ========= संसार में ईश्वर की सत्ता में विश्वास रखने वाले और न रखने वाले दोनों प्रकार के मनुष्य निवास करते हैं। किसी कवि ने तो यहां तक कह दिया है कि ‘खुदा के बन्दों को देखकर खुदा से मुनकिर हुई है दुनिया, कि जिसके बन्दे ऐसे हैं वह कोई अच्छा खुदा नहीं।’ आज के […]

Categories
आज का चिंतन

न तो आलसी बनें और ना ही विलासी : परिव्राजक

न तो आलसी बनें, और न ही विलासी बनें, अर्थात धन का दुरुपयोग न करें। आलस्य और धन का दुरुपयोग, ये दोनों ही कार्य गलत हैं। इन दोनों का दंड भोगना पड़ेगा। ईश्वर ने कर्मफल के अनुसार सबको मनुष्य पशु पक्षी इत्यादि शरीर दिया। उसे जीवित रखने के लिए शक्ति चाहिए। शक्ति प्राप्त करने के […]

Categories
आज का चिंतन कविता

अंधेरा सदा नहीं रह पाता ….

      अंधेरा सदा नहीं रह पाता…. रखना ईश्वर पर विश्वास, अंधेरा सदा नहीं रह पाता जीवन है आशा की डोर , आनंद है इसका छोर, हो जा उसी में भावविभोर, मनवा कभी नहीं कह पाता ….. जगत में बांटो खुशियां खूब, तुमसे पाए न कोई ऊब, जीवन का हो ये दस्तूर, हर कोई […]

Categories
आज का चिंतन स्वास्थ्य

आयुर्वेद : इतिहास, उपादेयता एवं प्रासंगिकता

  आयुर्वेद लिखनेवाले पुरुष को आप्त कहा जाता है, जिनको त्रिकाल (भूत, वर्तमान, भविष्य) का ज्ञान था। यद्यपि आयुर्वेद बहुत पुराने काल में लिखा गया है, तथापि वर्तमान में नये रूप में उभरनेवाली हर बीमारियों का समाधान इसमें समाहित है। आयुर्वेद मतलब जीवनविज्ञान है। अतः यह सिर्फ एक चिकित्सा-पद्धति नहीं है, जीवन से सम्बधित हर […]

Categories
आज का चिंतन

जीवन की सार्थकता इसी में है कि लोग आपसे मिलकर प्रसन्न हों

यदि आप के कारण कोई प्रसन्न होता है, तो इससे आपको पुण्य मिलता है। यदि आप के कारण कोई दुखी होता है, तो इससे आपको पाप लगता है। अतः पुण्य कमाएँ, पाप नहीं। व्यक्ति सुबह से रात्रि तक प्रायः खाली नहीं बैठता, दिनभर कुछ न कुछ कर्म करता रहता है। उन कर्मों में से कुछ […]

Categories
आज का चिंतन

हरियाणा में शिक्षा प्रसार में आर्य समाज का रहा है महान योगदान

  लेखक :- स्वामी ओमानन्द सरस्वती हरियाणा संवाद :- 10मई 1975 प्रस्तुति :- अमित सिवाहा महर्षि दयानन्द जी ने संसार का उपकार करने के लिए बम्बई में चैत्र शुक्ला प्रतिपदा विक्रमी सम्वत् १९३२ को आर्यसमाज की स्थापना की। उस समय आर्य जाति की रीति – नीति , सभ्यता , संस्कृति को पाचात्य सभ्यता का झंझावात […]

Exit mobile version