*********** नित बढ़ रहे हैं हम मृत्यु की ओर जिसका हमें कौड़ी भर नहीं ज्ञान जीने की लालसा लिए बैठे हैं हम कितने दिन जिएंगे, नहीं अनुमान। मृत्यु को जो देखते स्वयं के पास फटकते नहीं दुष्कर्म ,उनके पास निष्कलंकित होता जीवन उनका हो जाते हैं आम जनों में,वे खास। उम्र हमारा बढ़ रहा या […]
मृत्यु को जानो