. दुर्गुण – दुरित का शमन, किया करो हर रोज। जग की सेवा प्रति हरी से, करो स्वयं की खोज॥1686॥ भावार्थ:- जिस प्रकार दो कुंओं का स्वच्छ जल आपस में मिलकर एकाकार हो जाता है, ठीक इसी प्रकार जब भक्तों की आत्मा में परमात्मा के ईश्वरीय गुण आत्मसाता होते हैं तो उसकी आत्मा तदाकार हो […]
बिखरे मोती : प्रभु मिलन की चाह है तो……