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भयानक राजनीतिक षडयंत्र राजनीति संपादकीय

हम सभी चोर हैं?

भारतवर्ष में अंग्रेजों का शासन चाहे जितनी देर रहा हो उसके दिये गये कुसंस्कार और कुपरम्पराएं हमारा पीछा आज तक कर रही हैं। हम जब तक इन कुसंस्कारों से या कुपरम्पराओं से मुक्त नहीं हो जाते हैं, तब तक हम चाहे कितने ही स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस मना लें तब तक हम अपने आपको […]

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संपादकीय

‘गुदड़ी का लाल’ पहुंचा रायसीना हिल्स

‘गुदड़ी का लाल’ पहुंचा रायसीना हिल्स महामति चाणक्य ने बड़ा सुंदर कहा है कि राजा दार्शनिक और दार्शनिक राजा होना चाहिए। जिस देश में ऐसी परम्परा स्थापित हो जाती है उस देश में लोकतंत्र जीवित रहता है और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार भी बने रहते हैं। इतना ही नहीं राजा के दार्शनिक और दार्शनिक के […]

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भयानक राजनीतिक षडयंत्र संपादकीय

भारत में मानवाधिकार आयोग, भाग-3

भारत में मानवाधिकार आयोग, भाग-3 हमारा मानना है कि शूद्र अछूत तब नहीं बना कि जब उसके अधिकार छीन लिये गये, अपितु वह अछूत तब बना जब अधिकार छीनने वाला वर्ग कत्र्तव्यच्युत हो गया। उस वर्ग का कत्र्तव्य शूद्र के अधिकारों का संरक्षण था न कि उनका भक्षण या हनन। यदि वह अपने कत्र्तव्य के […]

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राजनीति विशेष संपादकीय संपादकीय

मायावती का राज्यसभा से त्यागपत्र

बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्यसभा की अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। ऐसा उन्होंने अपने खिसकते जनाधार को किसी न किसी प्रकार अपने साथ पुन: लाने के लिए किया है। जिससे कि उन्हें दलितों की सहानुभूति मिल सके। उनके इस राजनीतिक दांव के भविष्य में परिणाम क्या होंगे ये तो समय ही बताएगा, परंतु […]

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संपादकीय

भारत में मानवाधिकार आयोग, भाग-2

अधिकार मानवों के लिए होते हैं दानवों के लिए नहीं भारत में अब स्थिति और भी दु:खपूर्ण मोड़ ले रही है। यहां लुटेरों, हत्यारों, आतंकवादियों, बलात्कारियों और समाज के दुष्ट प्रवृत्ति के लोगों के अधिकारों के लिए भी आवाजें उठ रही हैं। मानवाधिकारवादी फांसी की सजा का विरोध कर रहे हैं, वे आततायी और दुष्ट […]

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भयानक राजनीतिक षडयंत्र संपादकीय

भारत में मानवाधिकार आयोग, भाग-1

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में मानवाधिकारवादी संगठन भी खड़े हुए हैं। भारत में एक मानवाधिकार आयोग भी गठित किया गया है। लोकतांत्रिक देशों में यह एक स्वस्थ परंपरा है कि लोगों के अधिकार दिलाने और समझाने के लिए एक आयोग गठित किया जाए। किंतु इस प्रकार के मानवाधिकार आयोग के गठन से पूर्व इस […]

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राजनीति

अमरनाथ हमले का दुखद राजनीतिकरण

राष्ट्र भयाक्रांत दिख रहा है जो स्वाभाविक है, क्योंकि श्रद्धालु धार्मिक विश्वास की यात्रा पर थे। इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। जैसे-जैसे दिन गुजरे, दुर्भाग्य से पूरे धारावाहिक का राजनीतिकरण हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि उसे इस बात की कोई चिंता नहीं है कि […]

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देश विदेश महत्वपूर्ण लेख मुद्दा

दोकलाम-विवाद: मोदी और शी बात करें

पिछले लगभग एक माह से भारत और चीन की फौजें आमने-सामने हैं। उन्होंने एक-दूसरे की सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया है बल्कि भूटान के दोकलाम नामक एक पठार को लेकर दोनों देशों के फौजियों के बीच धक्का-मुक्की और कहा-सुनी हुई है। गनीमत है कि तोपें और बंदूकें नहीं चली हैं। भारत और चीन की सीमाएं […]

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भयानक राजनीतिक षडयंत्र संपादकीय

लोकतंत्र के हत्यारे बने राजभवन, भाग-3

सन् 2000 में बिहार में ही राज्यपाल विनोद चंद्र पांडेय ने अति उत्साह का परिचय देते हुए नीतीश कुमार को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। बाद में विधायकों का जुगाड़ पूरा न होने पर सत्ता की सुंदरी ने नीतीश कुमार को ठेंगा दिखा दिया और पुन: राबड़ी ही ‘रबड़ी’ का स्वाद चखने लगीं। राज्यपाल का […]

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भयानक राजनीतिक षडयंत्र राजनीति संपादकीय

लोकतंत्र के हत्यारे बने राजभवन, भाग-2

राजस्थान के राजभवन की घटना इसके पश्चात दूसरी बार लोकतंत्र की हत्या का यह ढंग राजस्थान के राजभवन में सन् 1967 में दोहराया गया। उस समय राजस्थान के राज्यपाल डा. संपूर्णानंद थे। उनके समय में राजस्थान में यह स्थिति आयी कि चुनावों में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत से कुछ पीछे रह गयी। तब ऐसी परिस्थितियों में […]

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