भारत में पाकिस्तान ने पुन: एक बार अस्थिरता फैलाकर पंजाब के गुरदासपुर जिले में एक पीड़ादायक आतंकी घटना को अंजाम दिया है। इस पर हम फिर चुप लगा गये हैं। ‘अहिंसा, चरखा और सत्याग्रह’ के प्रपंच ने भारत के इतिहास को और हमारी वीर परंपरा को इतना विकृत और छलनी कर दिया है कि कुछ […]
Month: July 2015
कांग्रेस में गांधीजी का आविर्भाव 1914 ई. से हुआ। 1922 ई. में गांधीजी ने पहली बार कहा कि भारत का राजनैतिक भाग्य भारतीय स्वयं बनाएंगे। कांग्रेस के इतिहास लेखकों ने गांधीजी के इस कथन को संविधान निर्माण की दिशा में उनकी और कांग्रेस की पहली अभिव्यक्ति के रूप में निरूपति किया है। जिसका अभिप्राय है […]
कलाम ऐसे बने थे राष्ट्रपति
मे. वीरसिंह आर्य जिस समय कलाम देश के राष्ट्रपति थे उस समय मुझे उनके गृह जनपद स्थित उनके अपने घर को देखने का और उनके बड़े भाई से मिलने का अवसर मिला था। वह लम्हा मेरी जिंदगी का यादगार लम्हा साबित हुआ। आज भी मुझे जब उनके भाई के द्वारा बताये गये कुछ संस्मरण याद […]
धन की सनक से ध्वस्त होती शिक्षा
प्रो. एनके सिंह एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन हैं पहले यह परंपरा थी कि शिक्षण संस्थाओं का नेतृत्व पेशेवर लोग करते थे। यदि व्यापारी इसमें निवेश भी करता था तो निवेश के बाद इसका प्रशासन और अकादमिक निर्णय लेने का अधिकार योग्य और पेशेवर लोगों को सौंप दिया जाता था। इसी के साथ […]
बदलता परिवेश और रहन-सहन शहर में मधुमेह के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा कर रहा है। खान-पान पर नियंत्रण न होना भी इसके लिए जिम्मेदार है। डायबिटीज के मरीज को सिरदर्द, थकान जैसी समस्याएं हमेशा बनी रहती हैं। मधुमेह में खून में शुगर की मात्रा बढ जाती है। वैसे इसका कोई स्थायी इलाज […]
शादाब जाफर चमत्कारिक प्रतिभा के धनी डॉ0 अवुल पकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम भारत के ऐसे पहले वैज्ञानिक थें, जो देश के सब से बडे पद राष्ट्रपति (11वें राष्ट्र पति के रूप में) के पद पर भी आसीन हुए। वे देश के ऐसे तीसरे राष्ट्रपति (अन्य दो राष्ट्र पति हैं सर्वपल्लीन राधाकृष्णन और डॉ0 जा़किर हुसैन) […]
अशोक प्रवृद्ध पूर्णत: मानसून पर निर्भर हमारे देश भारत में वर्षा अर्थात बारिश को सदैव से ही ईश्वर की वरदान के रूप में देखा जाता रहा है, परन्तु अब बारिश के बाद शहरों व गांवों में जो हालात पैदा होने लगे हैं उससे यह वरदान अभिशाप साबित होने लगा है और बारिश होने के साथ […]
धरती को जीने लायक कैसे बनाएं
भारतीय संस्कृति के उद्भट्ट प्रस्तोता के रूप में ख्याति प्राप्त पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम के अंतिम शब्द थे-‘धरती को जीने लायक कैसे बनाएं?’ कलाम साहब के इस प्रश्न का उत्तर स्वयं उनका अपना जीवन है, मनुष्य स्वयं को उनके जैसा बना ले तो यह धरती जीने लायक अपने आप हो जाएगी। […]
संसदीय अवरोधों की त्रासदी
कुलदीप नैयर लेखक संसद में इस तरह की अव्यवस्थाएं किसी भी कोण से जायज नहीं ठहराई जा सकतीं। मुझे डर लगने लगा है कि इस तरह से कहीं मानसून सत्र पूरी तरह से धुल न जाए। अगर ऐसा होता है, तो लंबे समय तक इस नुकसान की भरपाई नहीं हो पाएगी। संसद के ये अवरोध […]
पूरे देश को रुला गए कलाम
सुरेश हिन्दुस्थानी भारत भूमि पर पैदा हुए जाज्वल्यमान नक्षत्रों में शुमार भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं। उनके चले जाने से पूरे देश में शोक की ऐसी लहर दौड़ी कि हर कोई गमगीन दिखाई दिया। डॉ. कलाम के जाने के जाने से पूरा भारत रो दिया। उनके […]