रत्नगर्भा वसुन्धरा होने के बावजूद भारतभूमि में आज का सबसे बड़ा संकट प्रतिभाओं के लिए अवसरों की अनुपलब्धता का है। रोजगार और राजनीति का क्षेत्र छोड़ भी दिया जाए तो हर तरफ यह संकट बना हुआ है कि अब आगे क्या होगा? योग्य और प्रतिभा सम्पन्न लोगों की कोई कमी नहीं है इसके बावजूद उन्हें […]
Month: October 2014
गतांक से आगे….. ये मिनट बढक़र दो हजार वर्ष में एक मास के बराबर हो जाते हैं। परिणाम यह होता है कि हर दो हजार वर्ष में वसंत सम्पात नाक्षत्र वर्ष से एक महीना पीछे हो जाता है। इसी कारण से कृत्तिकाकाल मृगशीर्षकाल और पुनर्वसुकाल से संबंध रखने वाले तीनों पंचांगों का वर्णन किया गया […]
हमारे हर कर्म को करने से पहले या हमारे जीवन की कोई सी अच्छी-बुरी घटना होने से पूर्व हमारी आत्मा को उसके स्पष्ट संकेत प्राप्त हो जाते हैं और वह कम से कम दो बार हमें इस बारे में कभी स्पष्ट तो कभी प्रतीकात्मक रूप से इसके बारे में संकेत देती ही है। यह अलग […]
(‘उगता भारत’ के प्रेरणास्रोत पूज्य महाशय राजेन्द्र सिंह आर्य जी की 103वीं जयंती 5 अक्टूबर 2014 और पूज्या श्रीमती सत्यवती आर्या जी की 89वीं जयंती 8 अक्टूबर 2014 के अवसर पर, विशेष रूप से तैयार यह आलेख आज के समाज में माता पिता के प्रति हमारे दृष्टिकोण में आ रहे परिवर्तन को ठीक करने में […]
राजनीति में कहां बची है नैतिकता?
शिवकुमार गोयल वास्तव में आज भारत का गणतंत्र दल-दल में धंसता दिखाई देता है। स्वाधीनता के बाद भारत यदि सबसे अधिक किसी क्षेत्र में संकट ग्रस्त है तो वह है नैतिक मूल्यों का संकट। अपने महान आध्यात्मिक व नैतिक मूल्यों, उच्चादर्शों जैसे सदगुणों के कारण जगतगुरू के रूप में विख्यात रहा भारत आज तेजी से […]
दूध के साथ दही लें या नहीं? दूध और दही दोनों की तासीर अलग होती है। दही एक खमीर वाली चीज है। दोनों को मिक्स करने से बिना खमीर वाला खाना (दूध) खराब हो जाता है। साथ ही, एसिडिटी बढ़ती है और गैस, अपच व उलटी हो सकती है। इसी तरह दूध के साथ अगर […]
जीवन निर्वाह की दो-तीन धाराएँ हैं जिन पर चलते हुए हम पूरी जिंदगी गुजार दिया करते हैं। एक वे हैं जो अपने हुनर और दक्षता के अनुरूप कर्मयोग में रमे रहते हैं और हर घटना-दुर्घटना और हलचल को भगवान का प्रसाद मानकर चलते हैं। दूसरी किस्मों के लोग जो कुछ कर रहे हैं वह सभी […]
वैज्ञानिकों का हार्दिक अभिनंदन
एक ऐसी खुशी जो हमें कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक एक होने की गौरवपूर्ण अनुभूति कराने की क्षमता रखने में समर्थ हो तो उस खुशी में ही झलकता है हमारे भीतर का छिपा हुआ राष्ट्र्रवाद और छिपी हुई राष्ट्रीयता। मंगलयान की सफलता पर 24 सितंबर को जब देश के प्रधानमंत्री मोदी ने […]
अर्थहीन हो गया है रावण दहन
लगता नहीं कि आज के मौजूदा माहौल में रावण दहन अर्थहीन हो गया है, औचित्य खो चुका है और जिस संदेश को देने के लिए रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होता रहा है, प्रतीकात्मक लंका को जलायी जाती रही है, वह संदेश स्वीकारने का साहस अब किसी में बचा ही नहीं है। […]
विश्व शांति के लिए योग ही एक उपाय:मोदी
व्यूरो कार्यालय भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका में जाकर जिस प्रकार मीडिया में मोदी का ‘इंडिया फीवर’ चढ़ाने में सफलता हासिल की है, उससे हर भारतीय को गर्व और गौरव की अनुभूति हुई है। मोदी ने अमेरिका में जहां भी कदम रखा है, वहीं ‘मोदी-मोदी’ का शोर सुनने को मिला, जिससे लगा कि […]