राकेश कुमार आर्य एक ओर भूख और कुपोषण से दम तोड़ता बचपन है तो दूसरी ओर देश में ऊंची ऊंची अट्टालिकाएं हैं जो गरीब और गरीबी दोनों पर इठला रही हैं। एक ओर गंदगी के ढेर में से ‘रोटियां’ ढूंढते बच्चे हैं तो दूसरी ओर हर सुविधा से संपन्न इस देश में एक वर्ग वो […]
Month: June 2013
-राकेश कुमार आर्य सार में किसी भी व्यक्ति से पूछा जाए कि एक और एक मिलकर कितने होते हैं? उत्तर आएगा कि दो होते हैं। कई लोग इसे ग्यारह भी बताते हैं। उनके ग्यारह बताने का भी विशेष अर्थ है। परंतु वैदिक गृहस्थाश्रम का गणित एक और एक के मिलन को न तो दो कहता […]
आज का चिंतन-17/06/2013
जहाँ व्यवसायिक मनोवृत्तिवहां न धर्म-कर्म न समाजसेवा – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com दुनिया में जहां मानवीय मूल्यों को प्रधानता प्राप्त है वहाँ लोक सेवा, परोपकार और सदाशयता के साथ ही तमाम नैतिक मूल्यों और आदर्शो को […]
बिखरे मोती-भाग 6
सत्पुरूषों के कारनै, कुल उत्तम कहलायसर्प सिंह और अग्नि का,जो करता तिरस्कार।छेड़कै इन्हें छोड़ो नहीतत्क्षण देना मार।। 89।। लता सहारा ढूंढती,वृक्ष बढै़ खुद आप।जिनका अपना वजूद हो,दूर रहै संताप ।। 90।। सत्य प्रेम करूणा यहां,जिनके हों आधार।धन यश में वृद्घि करें,रक्षा करे करतार।। 91।। अग्नि व्यापक काष्ठ में,जब तक नही जलाय।वायु के संसर्ग से,वन में […]
राजा ययाति और लाल कृष्ण आडवाणी
विनोद कुमार सिन्हावैदिक युग में आर्यावर्त्त में एक अति पराक्रमी राजा हुआ करते थे। नाम था ययाति। वे सूर्यपुत्र मनु के वंशज और इन्द्रासन के अधिपति रहे महान राजा नहुष के पुत्र थे। यश, पराक्रम और कुशल प्रजापालन में वे कही से भी अपने पिता नहुष से उन्नीस नहीं थे। एक बार आखेट करते समय […]
मधुसूदनगुजराती विश्वकोश कहता है, कि,नक्षत्रों की अवधारणा भारत छोडकर किसी अन्य देश में नहीं थी। यह, अवधारणा हमारे पुरखों की अंतरिक्षी वैचारिक उडान की परिचायक है, नक्षत्रों का नामकरण भी पुरखों की कवि कल्पना का और सौंदर्य-दृष्टि का प्रमाण है। महीनों के नामकरण में, उनकी अंतरिक्ष-लक्ष्यी मानसिकता का आभास मिलता है।(दो) अंतरिक्षी दृष्टि, या वैचारिक […]
आज का चिंतन-15/06/2013
भूखे-प्यासे रहें आस-पास के प्राणीतो कर्मकाण्ड-अनुष्ठान सब हैं बेमानी डॉ. दीपक आचार्य9413306077dr.deepakaacharya@gmail.com धर्म जैसे विराट आकाश को लोगों ने कर्मकाण्ड, यज्ञ और अनुष्ठानों या कि नाम कमाने के लिए किए जाने वाले तथाकथित पुण्य कर्मों तक ही सीमित कर दिया है।भीषण गर्मी के इस दौर में जहां आदमी सारे जतन करने के बाद भी झुलसने लगा […]
आडवाणी अनर्थ की राह पर
भाजपा का गोवा सम्मेलन पूर्ण हो गया है, इसने वही संकेत और संदेश दिये हैं जो इससे उम्मीद की जाती थी। भाजपा नेता आडवाणी अपनी जगहंसाई करा गये, परंतु राजनाथ सिंह अपने स्टैंड पर मजबूत रहे, जैसा कि उन्होंने विगत 14 अप्रैल को जब मेरी उनसे मुलाकात हुई थी तो उसमें इस विषय पर अपना […]
इंकलाब जिंदाबाद-६
शांता कुमारगतांक से आगे…यदि गांधीजी को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अहिंसा के मार्ग पर चलने का अधिकार था तो देश के इन जवानों को मां की गुलामी की श्रंखला तोड़ने के लिए उतने ही आदर और सम्मान से हिंसा का मार्ग अपनाने का अधिकार था। सिर इस मार्ग को प्रभु, राम, कृष्ण, शिवाजी, प्रताप, सावरकर […]
आज का चिंतन-14/06/2013
प्रेमपूर्वक उपेक्षित ही रखें मूर्खों और नासमझों कोडॉ. दीपक आचार्य9413306077dr.deepakaacharya@gmail.comहमारी दैनंदिन जिन्दगी में कई सारे मौके ऎसे आते हैं जब नासमझों और मूर्खों से पाला पड़ता है। हमारे संपर्क में आने वाले लोगों में यदि समझदार हों तो उनसे चर्चा करना और उन्हें समझाना ज्यादा आसान होता है लेकिन खूब सारे लोग ऎसे होते हैं […]