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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

“महर्षि दयानन्द की प्रमुख देन चार वेद और उनके प्रचार का उपदेश”

ओ३म् ======== महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार का मार्ग क्यों चुना? इसका उत्तर है कि उनके समय में देश व संसार के लोग असत्य व अज्ञान के मार्ग पर चल रहे थे। उन्हें यथार्थ सत्य का ज्ञान नहीं था जिससे वह जीवन के सुखों सहित मोक्ष के सुख से भी सर्वथा अपरिचित व वंचति थे। […]

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आज का चिंतन

“सृष्टि में ईश्वर का अस्तित्व सत्य व यथार्थ है”

ओ३म् ========= हम जिस संसार को देखते हैं वह अति प्राचीन काल से विद्यमान है। यह कब बना, इसका प्रमाण हमें वेद, वैदिक साहित्य एवं इतिहास आदि परम्पराओं से मिलता है। आर्य लोग जब भी कोई पुण्य व शुभ कार्य करते हैं तो वह संकल्प पाठ का उच्चारण करते हैं। इसमें कर्मकत्र्ता यजमान का नाम, […]

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आज का चिंतन

“वैदिक धर्म का समग्रता से प्रचार गुरुकुलीय शिक्षा से ही सम्भव”

ओ३म् =========== गुरुकुल एक लोकप्रिय शब्द है। यह वैदिक शिक्षा पद्धति का द्योतक शब्द है। वैदिक धर्म व संस्कृति का आधार ग्रन्थ वेद है। वेद चार हैं जिनके नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद हैं। यह चार वेद सृष्टि के आरम्भ में सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, अनादि, अनन्त, न्यायकारी, सृष्टिकर्ता और जीवों को उनके […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “महर्षि दयानन्द की प्रमुख देन चार वेद और उनके प्रचार का उपदेश”

======== महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार का मार्ग क्यों चुना? इसका उत्तर है कि उनके समय में देश व संसार के लोग असत्य व अज्ञान के मार्ग पर चल रहे थे। उन्हें यथार्थ सत्य का ज्ञान नहीं था जिससे वह जीवन के सुखों सहित मोक्ष के सुख से भी सर्वथा अपरिचित व वंचति थे। महर्षि […]

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व्यक्तित्व

75वें जन्म दिवस पर “हम सबके प्रेरणास्रोत और श्रद्धास्पद स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती”

ओ३म् ========= परम पिता परमात्मा ने सृष्टि के आरम्भ में संसार के सभी मनुष्यों के पूवर्जों को वेदों का ज्ञान दिया था और आज्ञा की थी कि जीवात्मा व जीवन के कल्याण के लिए संसार की प्रथम वैदिक संस्कृति को अपनाओं व धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष के मार्ग का अनुसरण करो। इस मार्ग पर […]

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आज का चिंतन

“सोम प्रभु की महिमा”

ओ३म् ======= त्वं सोम क्रतुभिः सुक्रतुर्भूस्, त्वं दक्षैः सुदक्षो विश्ववेदाः। त्वं वृषा वृषत्वेभिर्महित्वा, द्युम्नेभिर् द्युम्न्यभवो नृचक्षाः।। ऋग्वेद 1.91.2 ऋषिः गोतमः राहूगणः। देवता सोमः। छन्दः पंक्ति।। (सोम) हे जगदुत्पादक तथा शुभगुणप्रेरक परमात्मन्! (त्वं) तू (क्रतुभिः) प्रज्ञाओं और कर्मों से (सुक्रतुः) सुप्रज्ञ और सुकर्मा (भूः) हुआ है। (विश्ववेदाः) सर्वव्यापक तथा सर्वज्ञ (त्वं) तू (दक्षैः) दक्षताओं एवं बलों […]

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आज का चिंतन उगता भारत न्यूज़

आध्यात्म-पथ पत्रिका द्वारा आयोजित चतुर्दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेद सम्मेलन- “राष्ट्रोन्नति के लिये वैदिक चिन्तन आवश्यक: प्रो0 डा0 महावीर” “वेदों में है विश्व-कल्याण का मंत्र: आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री”

ओ३म् ========= अध्यात्म पथ मासिक पत्रिका द्वारा ऑनलाइन जूम पर अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आर्य विद्वान आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री के संयोजन व संचालन में आयोजित चतुर्दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेद सम्मेलन का आयोजन किया गया। ’पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार’ के प्रति-उपकुलपति मुख्यवक्ता प्रो0 डा0 महावीर अग्रवाल जी ने कहा कि वेदों में राष्ट्रोन्नति का चिन्तन वेदों के दीवाने ऋषिवर […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

एक विस्मृत वैदिक ऋषि-भक्त शास्त्रार्थ महारथीः पं. गणपति शर्मा’

(27 जून को स्मृति दिवस पर प्रकाशित) पं. गणपति शर्मा जी का जन्म राजस्थान के चुरु नामक नगर में सन् 1873 में श्री भानीराम वैद्य जी के यहां हुआ था। आप पाराशर गोत्रीय पारीक ब्राह्मण थे। आपके पिता ईश्वर के सच्चे भक्त व उपासक थे। पिता का यही गुण उनके पुत्र गणपति शर्मा में भी […]

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उगता भारत न्यूज़

आध्यात्म-पथ पत्रिका द्वारा आयोजित चतुर्दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेद सम्मेलन- “राष्ट्रोन्नति के लिये वैदिक चिन्तन आवश्यक: प्रो0 डा0 महावीर” “वेदों में है विश्व-कल्याण का मंत्र: आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री”

ओ३म् ========= अध्यात्म पथ मासिक पत्रिका द्वारा ऑनलाइन जूम पर अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आर्य विद्वान आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री के संयोजन व संचालन में आयोजित चतुर्दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेद सम्मेलन का आयोजन किया गया। ’पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार’ के प्रति-उपकुलपति मुख्यवक्ता प्रो0 डा0 महावीर अग्रवाल जी ने कहा कि वेदों में राष्ट्रोन्नति का चिन्तन वेदों के दीवाने ऋषिवर […]

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गौ और गोवंश

एक गाय के जीवन भर के दुग्धादि से 8 से 10 लाख मनुष्यों के एक समय के भोजन की तृप्ति होती हैः स्वामी धर्मेश्वरानन्द’

ओ३म् ========= श्रीमद्दयानन्द ज्यातिर्मठ आर्ष गुरुकुल, पौन्धा-देहरादून में दिनांक 2-6-2018 को तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के प्रातःकालीन सत्र में गो-कृष्यादि रक्षा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में आर्य प्रतिनिधि सभा, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मंत्री स्वामी कीर्तिशेष स्वामी धर्मेश्वरानन्द सरस्वती जी का प्रभावशाली सम्बोधन हुआ था। अपने व्याख्यान में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण विषयों […]

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