लेखक :- स्वामी ओमानन्द सरस्वती स्त्रोत :- भाषाविभाग हरयाणा वार्षिक संगोष्ठी 1967 – 68 प्रस्तुतकर्ता :- अमित सिवाहा भारत के पतनकाल के समय आज से दो सो वर्ष पूर्व भी हरयाणा स्वर्ग के समान ही था । इसकी वैदिकसंस्कृति ज्यों की त्यों अविकृतरूप में थी । केवल पौराणिक प्रभाव के कारण तीर्थ , मूर्तिपूजादि का […]