भले ही गांधी की धोती , तेरे खातिर गहना था .. मुझे दिखा दो बस वो फंदा, जिसे भगत सिंह ने पहना था … * चलो मान लिया कि चरखे ने ही, उन सारे अंग्रेजों को पटका था … पर हमको दे दो वो पावन रस्सी , जिस पर मेरा बिस्मिल लटका था.. * हम […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
भले ही गांधी की धोती , तेरे खातिर गहना था .. मुझे दिखा दो बस वो फंदा, जिसे भगत सिंह ने पहना था … * चलो मान लिया कि चरखे ने ही, उन सारे अंग्रेजों को पटका था … पर हमको दे दो वो पावन रस्सी , जिस पर मेरा बिस्मिल लटका था.. * हम […]
समदर्शी योगी जिसको न इस संसार की कोई चाह शेष ही रही, जो कहता रहा हर हाल में जो भी मिला वो ही सही। चाह मिटी – चिंता मिटी , और शांत किया हो चित्त को, जो मग्न है प्रभु ध्यान में , योगी तो बस होता वही ।। जो आसक्त हो संसार में, वह […]
ध्यान – विधि प्रणव जप से ध्यान कर ईश्वर का स्वरूप। जो योगी ऐसा करें , वही हैं सच्चे भूप।। विषमता और उद्वेग से , बढ़े समता की ओर। योगी सच्चा है वही , पाये नभ का छोर ।। आत्मा का यह धर्म है , शांति – समता ध्यान। प्रसाद भी मिलता हमें, जब होवे […]
योगी का प्रयत्न योगी भोगी हो नहीं सकता, रोगी का तो प्रश्न कहाँ ? मोक्ष कमाना है उसका धंधा , भोग का तो प्रश्न कहाँ ? मान मिले सम्मान मिले, अक्षय आनन्द का वरदान मिले। पग – पग पर मिले उसे सफलता, युगों तक पहचान मिले।। धर्म ,अर्थ ,काम और मोक्ष का ज्ञान निरन्तर करता […]
भारत की दासता की कहानी का अन्त 15 अगस्त 1947 को हुआ। दासता की दास्तान सदियों तक भारत की आत्मा को झकझोरती रही और अपने निकृष्टतम स्वरूप में उसका दोहन करती रही। यातना और उत्पीडऩ के इस भयानक काल से मुक्ति के लिए हमारे वीर नायकों ने सदियों तक संघर्ष किया। भारत माता वीर प्रस्विनी […]
आत्म व्यवहार के अनुरूप परिणाम जब पतन वैचारिक होता है तो गिरता जाता मानव दल । जब उत्थान वैचारिक होता है तो बढ़ता जाता मानव दल।। ऐश्वर्याभिलाषी जीव सदा यहाँ , ऐश्वर्य हेतु ही आता। बलवीर्ययुक्त समर्थ जीवन को कोई बड़भागी ही पाता।। समझो ! हीनवीर्य हो जाना अपनी मृत्यु को है आमंत्रण । देना […]
योग युक्त मुनि और ईश्वर प्राप्ति सुखदाई शरण भगवान की है ज्ञानी जन उसको हैं पाते। योग युक्त जीवन जीते और संसार में हैं पूजे जाते।। उलझी सितार की तारों को जो सुलझाने में लगा रहा। खार जार में उलझ गया और मनचाहा कुछ पा न सका।। निरर्थक ऐसे जीवन हैं ,जो काल के थप्पड़ […]
राजनीति चौसर का खेल है। जिसमें सत्ता स्वार्थ साधने के लिए बड़ी-बड़ी चीजों को दांव पर लगा दिया जाता है। कहा जाता है कि राजनीति में कभी कोई किसी का स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता। यहां परिस्थितियां बड़ी तेजी से परिवर्तित होती हैं। ऐसे में यदि बिहार की बात करें तो बिहार की राजनीति […]
कर्म योग की श्रेष्ठता गुरु की कृपा से आता है वसंत हमारे जीवन में। गुरु ही भरता नई ऊर्जा, नव – स्फूर्ति जन-गण में।। करो कीर्तन सच्चे गुरु का यही वेद की आज्ञा है। कृतघ्नता का दोष लगे ना, इस पर ध्यान लगाना है।। साक्षात्कार जब हो जाता है, परमपिता से सीधा ही। मिट जाते […]
भारत में एक बार नहीं अनेक बार भारत छोड़ो आंदोलन चलाए गए हैं, अंतर केवल इतना है कि देश, काल , परिस्थिति के अनुसार उन आंदोलनों को भारत छोड़ो आंदोलन का नाम नहीं दिया गया। इसके साथ-साथ भारत के छद्म इतिहासकारों ने देश के क्रांतिकारियों के साथ विश्वासघात करते हुए उनके पुरुषार्थ और देशभक्ति को […]