सार तत्त्व तर्ज :- कह रहा है आसमां कि यह समा ……. धुआं दिखाई दे कहीं तो मान लो वहां आग है। जन मस्ती में गाते दिखें तो मान लो वहां फाग है।। जल को जीवन मानते सब , उसमें रस भगवान हैं। जल के बिन जीवन नहीं ,जीवन का जल आधार है।। नाम वासुदेव […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
सार तत्त्व तर्ज :- कह रहा है आसमां कि यह समा ……. धुआं दिखाई दे कहीं तो मान लो वहां आग है। जन मस्ती में गाते दिखें तो मान लो वहां फाग है।। जल को जीवन मानते सब , उसमें रस भगवान हैं। जल के बिन जीवन नहीं ,जीवन का जल आधार है।। नाम वासुदेव […]
ईश्वर की सर्वव्यापकता जीवन झोपड़ी जल रही उजड़ रहे हैं सांस। खांडव वन में पक्षीगण करते शोक विलाप ।। चला चली यहां लग रही गए रंक और भूप। समय पड़े तुझे जावणा मिट जावें रंग रूप ।। वह भीतर बैठा कह रहा , क्यों होता बेचैन ? धन – वैभव को भूलकर मुझे भजो दिन […]
रचना और प्रलय तर्ज :- कह रहा है आसमां कि यह समा ……. रचना भी करता हूँ मैं ही , पालना करता हूँ मैं। सब चराचर की जगत में प्रलय भी करता हूँ मैं।। अहंकार वश जिसने किया जीना कठिन संसार का। ऐसे हर इक दुष्ट जन का संहार भी करता हूँ मैं ।। झोपड़ी […]
सर्व व्यापक में दृष्टि से उत्थान मैत्री का सम्मान करो , कुछ करुणा का भी ध्यान करो । मुदिता भी अपनाइए समय पर उपेक्षा का बर्ताव करो।। सुखीजनों को देख कीजिए – प्रेमपूर्ण मित्रता का अनुबंध। दु:खीजनों को देख कीजिए, करुणा का दया पूर्ण संबंध।। करते हों जो पुण्य जगत में , उनसे हर्षित हो […]
भले ही गांधी की धोती , तेरे खातिर गहना था .. मुझे दिखा दो बस वो फंदा, जिसे भगत सिंह ने पहना था … * चलो मान लिया कि चरखे ने ही, उन सारे अंग्रेजों को पटका था … पर हमको दे दो वो पावन रस्सी , जिस पर मेरा बिस्मिल लटका था.. * हम […]
समदर्शी योगी जिसको न इस संसार की कोई चाह शेष ही रही, जो कहता रहा हर हाल में जो भी मिला वो ही सही। चाह मिटी – चिंता मिटी , और शांत किया हो चित्त को, जो मग्न है प्रभु ध्यान में , योगी तो बस होता वही ।। जो आसक्त हो संसार में, वह […]
ध्यान – विधि प्रणव जप से ध्यान कर ईश्वर का स्वरूप। जो योगी ऐसा करें , वही हैं सच्चे भूप।। विषमता और उद्वेग से , बढ़े समता की ओर। योगी सच्चा है वही , पाये नभ का छोर ।। आत्मा का यह धर्म है , शांति – समता ध्यान। प्रसाद भी मिलता हमें, जब होवे […]
योगी का प्रयत्न योगी भोगी हो नहीं सकता, रोगी का तो प्रश्न कहाँ ? मोक्ष कमाना है उसका धंधा , भोग का तो प्रश्न कहाँ ? मान मिले सम्मान मिले, अक्षय आनन्द का वरदान मिले। पग – पग पर मिले उसे सफलता, युगों तक पहचान मिले।। धर्म ,अर्थ ,काम और मोक्ष का ज्ञान निरन्तर करता […]
भारत की दासता की कहानी का अन्त 15 अगस्त 1947 को हुआ। दासता की दास्तान सदियों तक भारत की आत्मा को झकझोरती रही और अपने निकृष्टतम स्वरूप में उसका दोहन करती रही। यातना और उत्पीडऩ के इस भयानक काल से मुक्ति के लिए हमारे वीर नायकों ने सदियों तक संघर्ष किया। भारत माता वीर प्रस्विनी […]
आत्म व्यवहार के अनुरूप परिणाम जब पतन वैचारिक होता है तो गिरता जाता मानव दल । जब उत्थान वैचारिक होता है तो बढ़ता जाता मानव दल।। ऐश्वर्याभिलाषी जीव सदा यहाँ , ऐश्वर्य हेतु ही आता। बलवीर्ययुक्त समर्थ जीवन को कोई बड़भागी ही पाता।। समझो ! हीनवीर्य हो जाना अपनी मृत्यु को है आमंत्रण । देना […]