45 मधु का झरना देखकर, हुआ बड़ा आनंद । कण-कण में मधु रम रहा पावे ना मतिमंद।। पावे ना मतिमंद , अभागा यूं ही भटकता। वेद से रहता दूर , मधु के ना पास फटकता।। मधु का चस्केबाज , इसे पीता है हर दिन। नाम जप का वह मधुरस, पीता है हर दिन।। 46 प्रकृति […]
कुंडलियां … 14 मधु का झरना देखकर…….