79 साधु की संगत भली, करती भव से पार। जो कुसंगत में फंसे, पाता कष्ट अपार।। पाता कष्ट अपार ,कभी ना चैन से सोता। हर क्षण रहता व्याकुल मन ही मन रोता।। कर्तव्यपथ दिखावे साधु, नई चढ़ाता रंगत। जन्म सफल हो जाए,मिले साधु की संगत।। 80 साधु की संगत मिले, मन पावै संतोष। धीर,वीर, गंभीर, […]
कुंडलियां … 27 साधु की संगत भली……