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कविता

कुंडलियां … 9 ठाकुर रोशन सिंह के गांव में…

                    ठाकुर रोशन सिंह के गांव में...

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जून पच्चीस तेईस में, पहुंचे तेरे गांव।।
श्रद्धा से सब झुक गए , पाई तेरी छांव।।
पाई तेरी छांव, मन को हुई तसल्ली।
हो सपना पूरा तेरा, बात मन में धर ली।।
क्रांति कर देश जगाया और किया आजाद।
बिस्मिल जैसे साथी तेरे ,आते सारे याद ।।

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जब तक सूरज दे रहा, धरती को प्रकाश।
नाम अमर तेरा रहे , पूरा है विश्वास।।
पूरा है विश्वास, जगत में अभिनंदन हो।
सर्वत्र रोशन आपका, नंदन हो – वंदन हो।।
उस माटी से तिलक किया जिसमें था तू खेला।
जहां बैठ की राष्ट्रसाधना, वहीं लगाया मेला।।

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पूर्ण हुई मनोकामना, आत्मा हुई प्रसन्न।
असीम हर्ष अनुभव हुआ, खड़े हुए आसन्न।।
खड़े हुए आसन्न , मन ने गाया नया तराना।
कर नहीं पाते दर्श यदि ,पड़ता फिर पछताना।।
धन्य भाग समझे मित्रों ने जो भी साथ खड़े थे।
मेरे भावों के संग जुड़कर, अपने भाव जड़े थे।।

27 जून 2023

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक उगता भारत

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