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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से राजनीति विशेष संपादकीय

सरकारी नौकरी पेशा लोगों को भी मिले राजनीति करने की छूट

हमारे देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी एक बार अपनी सोवियत संघ की यात्रा पर थीं, जहां उन्होंने अपना भाषण अंग्रेजी में देना आरंभ कर दिया था। तब उन्हें वहां के राष्ट्रपति की उपस्थिति में इस बात के लिए टोक दिया गया था कि-‘आप अपना भाषण या तो हिंदी में दें या फिर रूसी […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से राजनीति विशेष संपादकीय

देश की राजधानी दिल्ली और राज्यों की स्थिति

भारत देश का संवैधानिक नाम भारत संघ (इंडियन यूनियन) है। इसका कारण यह बताया जाता है कि भारत विभिन्न राज्यों का एक संघ है। यद्यपि इन राज्यों की संवैधानिक स्थिति कभी के सोवियत संघ के राज्यों की स्थिति के सर्वथा भिन्न है। इसके अतिरिक्त ये राज्य किसी भी स्थिति परिस्थिति में ‘राष्ट्र राज्य’ नही हो […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से पर्यावरण भयानक राजनीतिक षडयंत्र भारतीय संस्कृति राजनीति

भारत का यज्ञ विज्ञान और पर्यावरण नीति, भाग-8

अकर्मण्यता हमारा लक्ष्य न हो प्रकृति अपना कार्य कर रही है, इतिहास अपना कार्य कर रहा है। कालचक्र अपनी गति से घूम रहा है। तीनों बातें भारत के पक्ष में हैं। किंतु इसका अभिप्राय यह कदापि नहीं है कि हम हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएं या अकर्मण्यता को गले लगाकर अपने दुर्भाग्य की पटकथा […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से मुद्दा राजनीति विशेष संपादकीय

कश्मीर का दर्द, देश का मर्ज और मोदी

1947 में साम्प्रदायिक आधार पर देश के बंटवारे को अपनी सहमति देने वाले नेहरू-गांधी की कांग्रेस आज तक कहे जा रही है कि ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।’ कांग्रेस अपने सामने लगे तथ्यों के ढेर की उपेक्षा करके अपनी झूठी बात के महिमामंडन करते रहने की अभ्यस्त रही है। इसके सामने इतिहास गला […]

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आओ कुछ जाने डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से भारतीय संस्कृति मुद्दा राजनीति विशेष संपादकीय

समय की आवश्यकता है-शहरों के नामों का भारतीयकरण

विश्व में भारतवर्ष एक ऐसा देश है, जिसके धर्म, संस्कृति और इतिहास सर्वाधिक प्राचीन हैं। इस दृष्टिकोण से भारतवर्ष का धर्म वैश्विक धर्म है, भारत की संस्कृति वैश्विक संस्कृति है और भारत का इतिहास (यदि वास्तव में खोजकर तथ्यपूर्ण ढंग से लिखा जाए तो) विश्व का इतिहास है। विश्व के ऐतिहासिक नगरों, देशों की राजधानियां […]

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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

औरंगजेब को सदा मिलती रहीं हिंदू वीरों की चुनौतियां

हमारे इतिहास के बारे म ेंहैनरी बीवरिज का मत भारत का इतिहास जिन लोगों ने विकृत किया है उन्हीं शत्रु इतिहास लेखकों के मध्य कुछ लोगों ने उदारता का परिचय देते हुए सत्य का महिमामंडन करने में भी संकोच नही किया है। ”ए काम्प्रीहैंसिव हिस्ट्री ऑफ इंडिया” (खण्ड-1 पृष्ठ 18) के लेखक हैनरी बीवरिज लिखते […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-63

स्वार्थभाव मिटे हमारा प्रेमपथ विस्तार हो गतांक से आगे…. स्वस्ति पन्थामनुचरेम् सूय्र्याचन्द्रमसाविव। पुनर्ददताअघ्नता जानता संगमेमहि।। (ऋ. 5/51/15) इस मंत्र में वेद कह रहा है कि जैसे सूर्य और चंद्रमा अपनी मर्यादा में रहते और मर्यादा पथ में ही भ्रमण करते हैं, कभी अपने मर्यादा पथ का उल्लंघन नही करते वैसे हमें भी अपने कल्याणकारी मार्ग […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से विशेष संपादकीय

क्यों कर रहा है किसान आत्महत्या?

भारत का ‘अन्नदाता’ इस समय आत्महत्या कर रहा है। जैसे-जैसे यह घटनाएं बढ़ती हैं, वैसे-वैसे ही विपक्षी पार्टियां चिल्लाती हैं कि सरकार किसानों के लिए कुछ नहीं कर रही है, और यह सरकार किसान विरोधी है। विपक्ष की इस चिल्लाहट के बीच सरकारें किसानों के कर्ज माफ कर रही हैं। पर देखा जा रहा है […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से पर्यावरण भयानक राजनीतिक षडयंत्र भारतीय संस्कृति मुद्दा राजनीति

भारत का यज्ञ विज्ञान और पर्यावरण नीति, भाग-5

पर्यावरण नियंत्रक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ’ में कार्यरत व्यक्तियों के लिए आवश्यक हो कि वे संस्कृत के जानने वाले तो हों ही, साथ यज्ञ विज्ञान की गहराइयों को भी सूक्ष्मता से जानते हों। कौन सी सामग्री किस मौसम में और किस प्रकार पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त करने में हमें सहायता दे सकती है-इस बात को ये लोग […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से पर्यावरण भयानक राजनीतिक षडयंत्र भारतीय संस्कृति मुद्दा राजनीति समाज

भारत का यज्ञ विज्ञान और पर्यावरण नीति, भाग-4

महर्षि दयानंद ने कहा था- ”यदि अब भी यज्ञों का प्रचार-प्रसार हो जाए तो राष्ट्र और विश्व पुन: समृद्घिशाली व ऐश्वर्यों से पूरित हो जाएगा।” इस बात से लगता है कि भारत सरकार से पहले इसे विश्व ने समझ लिया है।  देखिये-फ्रांसीसी वैज्ञानिक प्रो. टिलवट ने कहा है- ”जलती हुई खाण्ड के धुएं में पर्यावरण […]

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