चोटी जनेऊ ना दिये, चढ़ा दिये थे शीश। जीवन अर्पण कर दिया ,पा माँ का आशीष ॥18॥ त्याग, तपस्या, साधना , लाखों का बलिदान। हिन्दू – हिन्दी ध्यान में ,मन में हिन्दूस्थान॥19॥ पौरूष जगा मेरे देश का, भाग गये अंग्रेज । देख देश की वीरता, और देख देश का तेज ॥20॥ मुस्लिम – लीग अंग्रेज […]
देश का भूत, वर्तमान और भविष्य –2