गीत संख्या – 6 यज्ञ के लाभ और गीता तर्ज – हम वफा करके भी तन्हा रह गए ….. यज्ञ से आनन्द मिलता यह ऋषिवर कह गए। यज्ञ से भगवान मिलता यह मुनिवर कह गए।। यज्ञ से कल्याण पाता हर जीव जो जन्मा यहाँ। जिसने पकड़ा यज्ञ को वही तर गए ….. यज्ञ से आनन्द […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
गीत संख्या – 6 यज्ञ के लाभ और गीता तर्ज – हम वफा करके भी तन्हा रह गए ….. यज्ञ से आनन्द मिलता यह ऋषिवर कह गए। यज्ञ से भगवान मिलता यह मुनिवर कह गए।। यज्ञ से कल्याण पाता हर जीव जो जन्मा यहाँ। जिसने पकड़ा यज्ञ को वही तर गए ….. यज्ञ से आनन्द […]
गीता और संयम तर्ज : फूल तुम्हें भेजा है खत में…. ध्यान लगाकर सुन ले अर्जुन ! बात मेरी बड़ी गहरी है। हितचिन्तक जो धर्म का होता – वही देश का प्रहरी है ।। तुझको अपने धर्म पर चलना नहीं किसी पल डिगना है। जो मर्यादा खींची वेद ने , अटल उसी पर […]
गीता संदेश टेक : गीता का सन्देश यही बस कर्म तुम्हारे वश में है। कर्म ही करते जाना बन्दे तेरी भलाई इसमें है।। घर घर बैठे हैं अर्जुन ,हथियार फेंक दिए जीवन के। घोर निराशा मन में छाई, भाग रहे कायर बन के।। रसना और वासना हावी ,है त्राहिमाम मची […]
द कश्मीर फाइल्स के बाद कश्मीरी पंडितों के बारे में देश और समाज को सोचने समझने का बहुत कुछ अवसर मिला है। दुनिया ने भी यह देखा है कि कश्मीर में कांग्रेसी सरकारों के समय में क्या होता रहा है ? – ऐसे में कश्मीर की घटनाओं और कश्मीरी पंडितों की खबरों के बारे […]
गीता का दिव्य धर्म कर्तव्य कर्म की भव्यता – देती सदा आनन्द । ‘दिव्य धर्म’ इससे बड़ा देता परमानन्द।। कर्तव्य कर्म को जानकर जो जन करते काम। जग उनका वन्दन करे , जन करते गुणगान ।। ‘दिव्य धर्म’ हमसे कहे – जानो प्रभु की तान। संग उसी के तान दो निज कर्मों की तान।। जन्म […]
‘तलाश’ ( कहानी संग्रह) की संपादक डॉ अनीता श्रीवास्तव और सह संपादक श्रीमती सपना शर्मा हैं। इस कहानी संग्रह में विभिन्न विद्वान लेखक – लेखिकाओं की चयनित कहानियों को संकलित कर प्रस्तुत किया गया है। कुल 25 कहानियां इस पुस्तक में संकलित की गई हैं। जब भी कोई साहित्यकार कोई साहित्य सृजना करता है तो […]
गर्व से कहो हम वैदिक धर्मी आर्य / हिंदू हैं संसार में भारत के ऋषियों का ज्ञान अनूठा और बेजोड़ है। जब सारा संसार ज्ञान – विज्ञान के क्षेत्र में क, ख, ग नहीं जानता था, तब हमारे ऋषियों का ज्ञान-विज्ञान अपनी ऊंचाइयों को छू रहा था। वैदिक सृष्टि संवत के अवसर पर यदि हम […]
वैदिक संस्कृति पूर्णतया वैज्ञानिकता पर आधारित संस्कृति है । इसके प्रत्येक रीति – रिवाज, तीज- त्यौहार आदि के पीछे भी कोई न कोई वैज्ञानिक कारण होता है। परंपरा और रूढ़ि की विद्रूपता ने आज चाहे इन परंपराओं, रीति-रिवाजों व तीज त्योहारों को कितना ही विद्रूपित क्यों न कर दिया हो, परंतु ध्यान से देखने […]
हे ईश तुम हो सबकी बिगड़ी बनाने वाले । विनती सुनो हमारी, सृष्टि रचाने वाले ।। तेरा ही होवे चिंतन तेरा ही हो भजन भी। होवे मनन भी तेरा, तेरा ही हो यजन भी।। चिंता न कोई होवे चिंता मिटाने वाले … विनती सुनो हमारी, सृष्टि रचाने वाले .. संसार के निवासी दु:ख और धोखा […]
देश के जननायक नहीं धन के नायक लोग । धर्म से ‘निरपेक्ष ‘ हैं, जो महामारी का रोग।।35।। देशहित नहीं बोलते, करें स्वार्थ की बात। गिद्ध देश में पल रहे, नोंच रहे दिन रात।।36।। राष्ट्रीयता की बात कर, राष्ट्रधर्म से है दूर । सबके हित कुछ ना करें ,स्वार्थ में गये डूब॥37॥ देश को आंख […]