सुप्रभातम। शुभ दिवस। योग की संक्षिप्त में कविता के रूप में प्रस्तुति । कविता। आप सदैव संपन्न ,प्रसन्न ,स्वस्थ रहें। ईश्वर से हम एक दूजे के लिए ऐसा कहें। हम सदैव ईश्वर की शरण में रहें कर्मफल मानकर सुख -दुख को सहैं। हताशा निराशा का ना हो बोझ। अवसाद का भी ना हो कहीं खोज। […]