दिवाली कोई तो हमको समझाये,होती कैसी दीवाली। तेल नदारद दीया गायब,फटी जेब हरदम खाली। हँसी नहीं बच्चों के मुख पर,चले सदा माँ की खाँसी। बापू की आँखों के सपने,रोज चढ़ें शूली फाँसी। अभी दशहरा आकर बीता,सीता फिर भी लंका में। रावण अब भी मरा नहीं है,क्या है राघव-डंका में। गिरवी माता का कंगन है,बंधक पत्नी […]