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रानी दुर्गावती ने वीरमरण स्वीकार किया वेद धर्म के लिए

शत्-शत् नमन 5 अक्टूबर/जन्मदिवस, ज्वालारूपी रानी दुर्गावती जिनका हत्यारा था वो अकबर जिसे साजिशन बनाया गया महान* अकबर की महानता के गुण गाने वालों को आज पता भी नहीं होगा की आज किसका जन्म दिवस है। उन्हें भी नहीं पता होगा जिन्होंने आज़ादी , शौर्य , वीरता और बलिदान को केवल दो या चार परिवारों […]

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आत्रेयी -अपाला कथा

डॉ डी के गर्ग पौराणिक कथा — अपाला महर्षि अत्रि की एकमात्र पुत्री थीं. वह इतनी बुद्धिमान थीं कि वेदों की ऋचाएं एक बार पढ़कर ही कंठस्थ याद कर लेती. चारों वेदों को याद कर वह जल्द ही वेदज्ञ हो गई थी। अपाला बचपन से त्वचा रोग से पीड़ित थीं. इसकी वजह से अत्रि ऋषि […]

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भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग – 406 [हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से ..]

शिवाजी महाराज का शासन और व्यक्तित्व (अध्याय-04) 16 74 तक छत्रपति शिवाजी महाराज अपने लिए पर्याप्त क्षेत्र को जीत चुके थे। जिसके आधार पर वह अपने आप को राजा घोषित कर सकते थे और अब उन्होंने इसी दिशा में सोचना आरंभ भी कर दिया था। उधर मुगल सत्ता उन्हें राजा मानने को तैयार नहीं थी। […]

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इतिहास की पड़ताल पुस्तक से …. अर्जुन की चिता और जयद्रथ वध [अध्याय-4]

डॉ राकेश कुमार आर्य गतांक से आगे .. जयद्रथ वध के संबंध में हमारे समाज में कई प्रकार की भ्रांतियाँ बनी हुई हैं। इस संबंध में अज्ञानतावश लोगों का मानना है कि श्री कृष्ण ने दिन में ही अपनी माया से सूर्य को अस्त कर दिया था। जब अर्जुन जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा पूर्ण […]

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ओ३म् “महाभारत के बाद विश्व में वेदों के प्रचार का श्रेय ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज को है”

============ पांच हजार वर्ष पूर्व हुए महाभारत युद्ध के बाद वेदों का सत्यस्वरूप विस्मृत हो गया था। वेदों के विलुप्त होने के कारण ही संसार में मिथ्या अन्धविश्वास, पक्षपात व दोषपूर्ण सामाजिक व्यवस्थायें फैली हैं। इससे विद्या व ज्ञान में न्यूनता तथा अविद्या व अज्ञानयुक्त मान्यताओं में वृद्धि हुई है। आश्चर्य होता है कि सत्य […]

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भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग – 405 (हिंदवी स्वराज के संस्थापक शिवाजी और उनके उत्तराधिकारी पुस्तक से ..) *छत्रपति शिवाजी महाराज की नेतृत्व क्षमता, अध्याय – 3*

डॉ राकेश कुमार आर्य *कि* सी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके अपने निजी गुणों से ही नापा जाता है। जैसे गुणावगुण उसके भीतर होते हैं और उनमें से जिसका अधिक अनुपात होता है, वैसा ही उस व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है। यदि कोई व्यक्ति अवगुणों से भरा हुआ है तो उसका व्यक्तित्व भी अवगुण से […]

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इतिहास की पड़ताल पुस्तक से …. जयद्रथ और अभिमन्यु -अध्याय 3

अ पने ज्येष्ठ पिताश्री धर्मराज युधिष्ठिर और अन्य पांडवों के आग्रह और आदेश को स्वीकार कर अभिमन्यु ने भयंकर युद्ध करना आरंभ किया। वह जिधर भी निकलता उधर ही कौरव दल में हड़कंप मच जाता। उसका साहस और उसकी वीरता आज देखने लायक थी। आज दैवीय शक्तियाँ भी अभिमन्यु की वीरता और युद्ध कौशल को […]

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छपिया के स्वामीनारायण की बाललीलायें

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी एतिहासिक पृष्ठभूमि अनादि काल से ही भारत अवतारों, ऋषियों और साधुओं से सुशोभित होता रहा है। जब-जब दुष्ट तत्व धर्म का दमन करते हैं, तब-तब भगवान धर्म की पुनः स्थापना के लिए धरती पर अवतार लेते हैं। त्रेता के युग में भगवान रामचंद्र और द्वापर के अंत में भगवान कृष्ण दो […]

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भारत के 1235 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भाग- 404 [ हिंदी स्वराज के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज पुस्तक से …] हिंदू राष्ट्रनीति व हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज – भाग 2

शिवाजी का चरित्र शिवाजी के भीतर भारतीय संस्कृति के महान संस्कार कूट-कूट कर भरे थे । वह सदैव अपने माता – पिता और गुरु के प्रति श्रद्धालु और सेवाभावी बने रहे । उन्होंने कभी भी अपनी माता की किसी आज्ञा का उल्लंघन नहीं किया और पिता के विरुद्ध पर्याप्त विपरीत परिस्थितियों के होने के उपरांत […]

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क्या ‘द्रविड़’ भारतवर्ष के आदिवासी हैं?

लेखक- डॉ० शिवपूजनसिंहजी कुशवाहा “वैदिक गवेषक” प्रस्तोता- प्रियांशु सेठ जब भारतवर्ष पराधीन था और अंग्रेजों का प्रभुत्व था तब उन्होंने हमारी भाषा, वेष, इतिहास, संस्कृति सब का विनाश करने का प्रयत्न किया था। उन्होंने इतिहास में लिखवाया कि आर्य लोग भारत वर्ष के मूल निवासी नहीं वरन् बाहर से आए थे। यहां के आदि वासी […]

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