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भीम राव आम्बेडकर और उनके शिक्षा सम्बंधी विचार

भीम राव आम्बेडकर ने देश के निर्धन और बंचित समाज को प्रगति करने का जो सुनहरी सूत्र दिया था , उसकी पहली इकाई शिक्षा ही थी । इससे अन्दाज़ा लगाया जा सकता है कि वे गतिशील समाज के लिये शिक्षा को कितना महत्व देते थे । उनका त्रि सूत्र था- शिक्षा,संगठन और संघर्ष । वे […]

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आतंकवाद को बढ़ावा देता भ्रष्टाचार

निर्भय कर्ण आतंकवाद को रोकने के लिए पूरी दुनिया प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हमेशा प्रतिबद्ध नजर आती है और इसके लिए एक से बढ़कर एक दावा भी किया जाता रहता है। इसके बावजूद आतंकवाद की घटना समय दर समय होती ही रहती है। एशिया की ही बात करें तो भारत विभीत्ष रूप से आतंकवाद […]

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उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द और आर्य समाज

आर्य समाज उन्नीसवीं शताब्दी व उसके बाद देश का सामाजिक व राजनैतिक क्रान्ति का एम महान संगठन था व है जिसने अपनी मनुष्य जीवन के उद्देश्य को सफल करने वाली तर्कसंगत विचारधारा के कारण देश के सभी मतों व सम्प्रदायों को प्रभावित किया। महर्षि दयानन्द जिन अंग्रेज अधिकारियों, पादरियों, मौलवियों व विद्वानों आदि से मिलकर […]

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साक्षरता और परम्परा के मेल से बचेगा पानी

मनोज कुमारकरीब तीन दशकों से जल संकट को लेकर विश्वव्यापी बहस छिड़ चुकी है। यहां तक कहा जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के मुद्दे पर लड़ा जायेगा। स्थिति की गंभीरता को नकारा नहीं जा सकता है। इस दिशा में राज्य सरकार अपने अपने स्तर पर पहल कर रही हैं और जल संरक्षण […]

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मैं भी हिन्दू, तू भी हिन्दू मिलकर बोलो-सारे हिन्दू

हिन्दुत्व के विषय में उच्चतम न्यायालय ने ‘शास्त्री यज्ञपुरूष दास और अन्य विरूद्घ मूलदास भूरदास वैश्य और अन्य (1966एससीआर 242)’ में कहा है-‘‘जब हम हिंदू धर्म के विषय में सोचते हैं तो हमें हिंदू धर्म को परिभाषित करने में कठिनाई अनुभव होती है। विश्व के अन्य मजहबों के विपरीत हिंदू धर्म किसी एक दूत को […]

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धर्मनिष्ठ राजनीति और स्वामी दयानंद

महर्षि दयानन्द सरस्वती जी महाराज व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के समर्थक और प्रतिपादक थे। इस सन्दर्भ में उनकी मान्यता थी कि राजधर्म अर्थात् राजनीति का नीति और धर्म पर आधारित होना आवश्यक है। क्योंकि नीति और धर्म आधारित राजनीति ही व्यक्ति को मौलिक अधिकार प्रदान करती है, उसका सर्वांगीण विकास करने में समर्थ होती है। […]

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आर्य समाज और इसके पतितोद्धार कार्य की एक सर्वोत्तम प्रेरणाप्रद घटना

मनमोहन आर्य पराधीन भारत में एक गुजराती जन्मना व कर्मणा ब्राह्मण महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा 10 अप्रैल, सन् 1875 को मुम्बई के काकड़वाड़ी स्थान पर प्रथम आर्य समाज की स्थापना विगत 5,000 वर्षों में एक सर्वतोमहान क्रान्ति के सूत्रपात का ऐतिहासिक दिवस है। हमें देश में ऐसी कोई संस्था या आन्दोलन विगत 5,000 वर्षों में […]

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जम्मू कश्मीर में राज्यपाल राज से कई दल हुये नंगे

जम्मू कश्मीर की बाहरवीं विधान सभा के चुनाव नतीजे २३ दिसम्बर को घोषित हो गये थे । यद्यपि चुनाव परिणामों में विभिन्न दलों को मिली सीटों से इतना अन्दाज़ा तो हो ही गया था कि सरकार उतनी आसानी से नहीं बनेगी जितनी आसानी से २३ दिसम्बर से पहले समझा जा रहा था । लेकिन इतनी […]

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पेरिस में आतंकी हमला

फ्रांस की राजधानी पेरिस में शार्ली हेब्दो नामक पत्रिका के कार्यालय पर फ़िदायीन के दो इस्लामी आतंकियों ने आक्रमण करके बारह लोगों को मौत के घाट उतार दिया । जिनमें वे चार पत्रकार भी थे , जो पत्रकार जगत में अपने चुटीले कार्टूनों के नाते जाने पहचाने जाते थे । आज से कुछ साल पहले […]

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अपने दायित्वों के लिए प्रतिबद्ध है भारतीय पत्रकारि‍ता

डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय पत्रकारिता की यात्रा जैसे-जैसे समय के साथ आगे बढ़ती जा रही है, इसे लेकर चहुंओर जन मानस की आम धारणाओं में निरंतरी अंतर देखने को मिल रहा है। इसके वाबजूद भी आज ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो इसे वर्तमान और भविष्य की दिशा तय करने वाला सशक्त माध्यम मानते […]

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