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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

मनुष्य जाति का महान गुरु एवं सच्चा हितैषी ऋषि दयानंद सरस्वती

ओ३म् ============== परमात्मा ने 1.96 अरब वर्ष पूर्व इस संसार को बनाया था और तब से इसे चला रहा है। वह कभी सोता व आराम नहीं करता। यदि करता होता तो बहुत पहले इस संसार की प्रलय हो जाती। वह यह सब त्याग व पुरुषार्थ स्वाभाविक रूप से संसार के प्राणियों के लिये करता है। […]

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एक महान योद्धा : गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान

तराइन का दूसरा युद्ध:- एक साल बाद 1192 में गोरी ने अफगान ,ताजिक व तुर्क सैनिकों 1,20,00घुड़ सवारो सहित गजनी से मुल्तान ,लाहौर होते हुए तबरहिन्द(सरहिंद)होते हुये तराइन के मैदान में आकर मोर्चा संभाला लिया। पृथवीराज के साथ अनेक सामंत थे।एक लाख घुड़सवार ,300 हाथी,तथा पांच लाख पैदल सैनिक थे। लेकिन भीमदेवसोलकी और जयचंद गहड़वाल […]

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स्वामी दयानंद जी को कोलकाता पधारने का निमंत्रण देने वाले महर्षि देवेंद्रनाथ ठाकुर

(लेखक: प्रा. डॉ. कुशलदेव शास्त्री) ______________________________________ सुप्रसिद्ध कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पिता महर्षि देवेन्द्रनाथ ने राजा राममोहन राय की “ब्रह्मसमाज” की विरासत को आगे बढ़ाया, पर उनके कामों की विशेषता यह रही कि उन्होंने वेदों के अध्ययन को एक अविभाज्य अंग माना। उनके अनुसार प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रंथों में हिब्रू धर्म ग्रंथों से भी अधिक […]

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आर्य समाज स्थापना दिवस पर : ऋषि दयानंद और आर्य समाज ने वैदिक धर्म का पुनरुद्धार और देश उत्थान का कार्य किया

ओ३म् ============ ऋषि दयानन्द (1825-1883) के समय में सृष्टि के आदिकाल से आविर्भूत ज्ञान व विज्ञान पर आधारित सत्य सनातन वैदिक धर्म विलुप्त हो चुका था। इसके स्थान पर देश में वैदिक धर्म का स्थान अविद्या, अन्धविश्वास, पाखण्ड, सामाजिक असमानता, पक्षपात व अन्यायपूर्ण व्यवहार तथा परम्पराओं से युक्त मत-मतान्तरों ने ले लिया था। मूर्तिपूजा, फलित […]

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राम और कृष्ण को ऐतिहासिक महापुरुष समझकर उनका जीवन चरित्र पढ़ो और उनके आचरणों का अनुसरण करो

प्रस्तुति : ज्ञान प्रकाश वैदिक ***** वेद के इस मन्त्र में राम शब्द आया है। भद्रो भद्रया सचमान आगात्स्वसारं जारो अभ्येति पश्चात्। सुप्रकेतैर्द्युभिरग्निर्वितिष्ठन् रुशद्भिर्वर्णैरभि रामस्थात्।। 【सामवेद उत्तरार्चिक १२/५/३ (१५४८) ऋग्वेद १०/३/३] यहां ‘राम’ शब्द आया है। सायणाचार्य इसका अर्थ कहते हैं, ‘रामकृष्ण शार्वरतमः’ अर्थात राम कहते हैं रात के काले अंधेरे को। इससे मालूम होता […]

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गांधीजी ने क्यों नहीं रुकवाई थी भगत सिंह और उनके साथियों की फांसी ?

आज क्रांतिकारियों के सिरमौर भगत सिंह व उनके साथी राजगुरु व सुखदेव का बलिदान दिवस है। वास्तव में यह भारत का वह दिवस है जिसे सभी क्रांतिकारियों की स्मृति में ‘राष्ट्रीय बलिदान दिवस दिवस’ घोषित किया जाए तो कुछ भी गलत नहीं होगा। आज के इस लेख को हम केवल यहीं तक सीमित रखना चाहेंगे […]

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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है – – –

शहादत दिवस 23 मार्च पर विशेष डाॅ. राकेश राणा 28 सितम्बर, 1907 को पाकिस्तान परिक्षेत्र में पंजाब प्रांत के गांव लायलपुर में जन्मे भगत सिंह के पूरे परिवार में देशभक्ति की राष्ट्रीय धारा बह रही थी। पिता किशन सिंह, चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह की ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों के किस्से सुनते […]

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जब सुभाष की लोकप्रियता से चिढे गांधी जी ने डाल दी थी नेहरू व सुभाष के बीच में फूट

बात 1928 की है। जब देश की जनता पूर्ण स्वाधीनता के लिए अंगड़ाई ले रही थी पर पूर्ण स्वाधीनता के संकल्प को कांग्रेस का संकल्प बनाने में गांधीजी और उनके जैसे अन्य नरमपंथी लोग रोड़े अटका रहे थे । वह नहीं चाहते थे कि देश पूर्ण स्वाधीनता का संकल्प पारित करे। उन परिस्थितियों के बारे […]

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किसान क्रांति के प्रथम प्रणेता पथिक जी : 27 फरवरी जयंती पर विशेष

डाॅ. राकेश राणा विजय सिंह पथिक भारतीय राजनैतिक परिदृश्य पर ऐसा नेतृत्व हैं, जिन्होंने समाज के साथ मिलकर सफल सत्याग्रह की शैली ईजाद की। होली के दूसरे दिन दुल्हेंडी 27 फरवरी, 1884 को जन्में भूपसिंह ही विजय सिंह पथिक बने। उनके पिता व माता दोनों के परिवारों की 1857 की क्रांति में सक्रिय भागीदारी थी। […]

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महान क्रांतिकारी श्री विजय सिंह पथिक की ‘जयंती’ पर विशेष आलेख

देवेंद्र सिंह आर्य  आर्य वास्तव में गुर्जरों का इतिहास इतना गौरवपूर्ण है यदि उसको एक जगह संकलित करके राष्ट्र के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जाए तो जनमानस में क्रांति उत्पन्न हो जाएगी। तथा जो लोग यह कहते हैं कि गुर्जरों का इतिहास क्या है? यह गुर्जर कौन होते हैं? उनको ऐसे सभी प्रश्नों के उत्तर […]

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