मानव को मानव का विशेष यौन धर्म समझाकर उसके जीवन को संतुलित, मर्यादित और साधनामय बनाने की आवश्यकता है, इससे सभ्य समाज का निर्माण होगा। इसी से विश्व का कल्याण होगा और इसी आवश्यकता की पूत्र्ति से समाज की अस्त-व्यस्त अव्यवस्था ठीक होगी। मानव को मानव बना दें, यह सबसे बड़ा उपकार है। मानव स्वयं […]
Category: डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से
इस प्रकार भारत का निर्धन वर्ग भारतीय परंपरा का निर्वाह करते हुए संतानोत्पादन करता है। वह यह भी जानता है कि जो भी जीव गर्भ में आ गया उसे समय से पहले बलात् बाहर निकालना अर्थात उसका गर्भपात कराना-एक हत्या करना है। जबकि धनिक वर्ग के लोग निरोध आदि से वीर्य नाश तो करते ही […]
प्राचीन भारत के लगभग सभी राजशास्त्रियों ने राजा की सफलता के लिए षाड्गुण्य मत के साथ-साथ उपायों का भी वर्णन किया है। कामंदक का कथन है कि उपाय से मतवाले हाथियों के मस्तक पर भी चरण रख दिया जाता है। जल अग्नि को बुझाता है, परंतु उपाय द्वारा इस अग्नि से ही वह जल सुखा […]
देश के किसानों की दशा इस समय सचमुच दयनीय है। सारी राजनीतिक पार्टियां इस पर राजनीति तो कर रही है पर किसानों की समस्याओं का समाधान क्या हो, और कैसे निकाला जाए इस पर कोई कार्य नहीं हो रहा है। समस्या को उलझाकर उसे और भी अधिक जटिल करने की कुचालें और षडय़ंत्र तो सबके […]
अत: पश्चिम का आज का भौतिकवाद जिस प्रकार की श्रंगारप्रिय सामग्री मानव को परोस रहा है उसमें कामचेष्टा बलवती होनी स्वाभाविक है। तेल, उबटन, स्नान, इत्र, माला, आभूषण, अट्टालिका आदि के मध्य रहकर कोई स्त्री प्रसंग का निषेध करेगा भी तो कुण्ठा और मानसिक तनाव की अन्य व्याधियों से ग्रसित होगा ही। जैसे-खाली मन इंसान […]
भारत के नये राष्ट्रपति का चुनाव इन दिनों चर्चा में है। नये-नये नाम इस पद के लिए प्रत्याशी के लिए वैसे ही आ-जा रहे हैं, जैसे ऊपर से गिरते पानी में बुलबुले आते हैंं और समाप्त हो जाते हैं। बहुतों के मन में लड्डू फूट रहे हैं कि इस बार हो सकता है वही देश […]
भारत के चौदहवें राष्ट्रपति का चुनाव निकट है। हमें भाजपा की ओर से शीघ्र ही नये राष्ट्रपति का नाम मिलने वाला है। इसके लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, वैंकैया नायडू को नियुक्त कर दिया है। विपक्षी दलों से समन्वय स्थापित कर ये तीनों मंत्री अगले राष्ट्रपति […]
अन्नोत्पादन से कितने ही जीवों की हत्या हलादि से होती है। वनों का संकुचन होता है। फलत: पर्यावरण का संकट आ खड़ा होता है। इसलिए प्राकृतिक और स्वाभाविक रूप से जो कुछ हमें मिल रहा है वही हमारा स्वाभाविक भोजन है। अत: अन्न से रोटी बनाना और उसे भोजन में ग्रहण करना तो एक बनावट […]
कश्मीर : तथ्य और सत्य जम्मू कश्मीर राज्य की भारत संघ में विशेष स्थिति है। यह एक पहाड़ी राज्य है। इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 92 प्रतिशत भाग पहाड़ी है। यहां की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर है, तो शीतकालीन राजधानी जम्मू है। इस राज्य का कुल क्षेत्रफल (पाकिस्तान तथा चीन द्वारा कब्जाए गये क्षेत्रफल सहित) 2, […]
यदि डा. भीमराव अंबेडकर जी आज होते तो अपने नाम के हो रहे दुरूपयोग को देखकर बहुत आहत होते। डा. भीमराव अंबेडकर अपने नाम पर बनायी गयी ‘भीमसेना’ को बनाने की अनुमति भी कभी नही देते। साथ ही मायावती की ‘जय भीम और जयमीम’ योजना को भी कभी अपनी स्वीकृति प्रदान नहीं करते। स्पष्ट है […]