दसवीं किस्त। बृहद आरण्यक उपनिषद् आज की चर्चा बहुत सुंदर है। पृष्ठ संख्या 1114 पर निम्न उल्लेख मिलता है। स्वप्न से सुषुप्ति और तूर्य अवस्था में जीव के जाने की बात बतला कर उसका जागृत अवस्था में लौटना पूर्व में आठवीं, नवी किस्त में बताया जा चुका है। “एक योनि से दूसरी योनि में जीव […]