भक्ति चढ़ै परवान तो , वाणी हो खामोश । आँखियों से आंसू बह, मनुआ हो निर्दोष ॥1705 ॥ रसों का रस वह ईश है, भज उसको दिन – रात । एक दिन ऐसे जायेगा, ज्यों तारा प्रभात् ॥ 1706॥ नाम जन्म स्थान को, जाने प्राणाधार । संसृति से मुक्ति का , बिरला करे विचार॥1707॥ जीवन […]