मन-वाणी की साधना, दो ऐसी पतवार। जीवन – नैया को करें, भवसागर से पार॥1662॥ भावार्थ :- प्रायः मनुष्य तीन तरह से पाप करता है – मन ,वाणी और शरीर पाप के माध्यम है। इसके अतिरिक्त इन तीनों से शुभ – कर्म भी होते हैं, जो इस प्रकार हैं:- तन से होने वाले पाप:- अशुभ कर्म- […]
जीवन का सार,मन-वाणी की साधना