देखो भई ऐसा है, सबसे बड़ा पैसा है- यह पंक्तियां हमारी नहीं बल्कि एक विज्ञापन की है जिसे इस वक्त का सबसे बड़ा तथाकथित हंसोड़ बोलता है। इस बेचारे किराए के विदूषक की भी यही मजबूरी है क्योंकि यह एक छोटे से शहर के नितांत मध्यमवर्गीय परिवार का लडक़ा है जो अपने द्विअर्थी हाजिर जवाबी […]
Month: August 2015
मृत्युंजय दीक्षित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 34 वर्षों के बाद संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा करके देश के अपने धुर विरोधी राजनैतिक दलों को चौंकाने का प्रयास किया है। जब मीडियामें यह खबर आई थी कि पीएम मोदी यूएई की दो दिवसीय यात्रापर जाने वाले हैं तो किसी को उन पर विश्वास ही नहीं हो […]
बिहार में तेज हो रहा चुनावी घमासान
बिहार में 18 अगस्त को पीएम मोदी की आरा सहरसा की रैलियों में उमड़ी विशाल भीड़ और भीड़ के सामने पीएम की ओर से एक लाख 56 हजार करोड़ के मेगा पैकेज से बिहार विधानसभा के चुनावों की गतिविधियों में और अधिक तेजी आ गयी है। बिहार में दोनों गठबंधनों का स्वरूप भी लगभग साफ […]
कृतवर्मा की बात सुनकर कृष्ण को क्रोध आ गया
प्रस्तुति : श्रीनिवास आर्य तूने तो ऐसे निर्दोष योद्घाओं को रात की वेला में उस समय मार डाला जब वे सर्वथा निश्चिंत होकर सोये थे। उनकी हत्या करके तूने कौन सी वीरता दिखाई़ निद्रा में अचेत पांचाली के सुकुमार बालक तो शव की भांति निश्चल पड़े थे। पांचाली के उन पुत्रों की निर्ममतापूर्वक हत्या करवा […]
हिरोशिमा नागासाकी में, कोप की देखी थी दृष्टि।तुझे यौवन में मदहोश देख, आज कांप रही सारी सृष्टि। मानता हूं कोप तेरे से, हर जर्रा मिट जाएगा।किंतु अपने हाथों तू, आप ही मिट जाएगा। क्या कभी किसी को मिल पाएंगे, जीवन के कहीं निशान?अरे ओ आधुनिक विज्ञान! तेरी चमक -दमक में उड़ गये, जीवन के वे […]
18 अगस्त 2015 का दिन भारत के इतिहास के लिए एक स्मरणीय दिवस बन गया है। इस दिन न्यायपालिका के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए देश में जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपना आदेश देते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और अन्य उच्च […]
दो मुख्यमंत्रियों का ‘बेमेल विवाह’
राजनीति में यूं तो हमेशा ही नये-नये प्रयोग होते रहने की संभावनाएं प्रबल रहती हैं, पर भारत की राजनीति में तो ‘बेमेल के विवाह’ होने की पुरानी परंपरा है। यहां जिनमें विचारधारा का और नीतियों का कोई मेल नही होता वह भी किसी अपने ‘सांझे शत्रु’ को मारने के लिए अक्सर एक होते देखे गये […]
जीएसटी की कसौटी पर भारत की अर्थव्यवस्था
पार्थ उपाध्याय अर्थव्यवस्था को एकीकृत रूप दिए जाने और केंद्र-राज्यों के बीच कई स्तरों पर कर संबंधी जटिलताओं को समाप्त करने के लिए वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम का मूर्त रूप लेना बेहद जरूरी है। दुनिया के करीब डेढ़ सौ देश अपने यहां इस तरह की कर व्यवस्था लागू कर चुके हैं। हमारे देश में […]
भारतीय राष्ट्रवाद के मिथक और यथार्थ
सत्य प्रकाश चौधरी अभी जब हमने एक और स्वतंत्रता दिवस मनाया है, मैं भारतीय राष्ट्रवाद के तीन पहलुओं पर एक नजर डालना चाहूंगा। पहला है भारतीय नक्शे का मानवीकृत रूप, जैसा कि हमें बताया-पढ़ाया गया है। यह भारत माता की तसवीर है जो नक्शे की लकीरों से बनी है और राष्ट्र को साड़ी पहने एक […]
हवाओं के रुख को बताता मोदी का भाषण
के. बेनेडिक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस बार का स्वतंत्रता दिवस का भाषण यूं तो हमेशा की तरह उनकी वक्तृत्व शैली और श्रोताओं से जुडऩे की उनकी क्षमता की ही एक और बानगी था, लेकिन इस बार का भाषण उनके कई समर्थकों को शायद इसलिए निराशाजनक लगा हो, क्योंकि उसमें पर्याप्त सामग्री नहीं थी। कइयों […]