भारत प्राचीन काल से ही पन्थनिरपेक्ष देश रहा है। क्योंकि इसकी राज्य व्यवस्था का मूल आधार समग्र समाज की मंगल कामना रही है। राज्योत्पत्ति के लिए अथर्ववेद (19-41-1) में आया है :-भद्रमिच्छन्त ऋषय: स्वर्विदस्तपा दीक्षां उपनिषेदुरग्रे।ततो राष्ट्रं बलमोजश्च जातं तदस्मै देवा उपसंनमस्तु।।अर्थात समग्र समाज के कल्याण की कामना करते हुए क्रांति दर्शी (ऐसे राष्ट्र चिंतक […]
Month: May 2014
आज का चिंतन-07/05/2014
नौकरों के भरोसे बिगड़ेगी ही संतत – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com जो काम हमारे खुद के लिए निर्धारित हैं उन्हें हमेंं ही करना चाहिए, औरों के भरोसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए। यह बात जितनी कहने में सरल और सटीक है उतनी अनुकरण करने में कठिन है। हममें से अधिकांश लोग ऎसे हैं जो […]
बिखरे मोती-भाग 49
महापुरूष संसार में, परमपिता के फूलगतांक से आगे….आप प्रसन्न हैं तो संसार का धन वैभव ऐश्वर्य तो स्वत: ही मेरे पीछे पीछे दौड़ा आएगा और यदि आप किसी बात पर नाराज हो गये तो सब कुछ मिल हुआ भी छिन जाएगा। जैसे कोई पिता अपने पुत्र के आचरण से प्रसन्न होता है तो वह सहज […]
आज का चिंतन-06/4/2014
चित्रकथाओं से जगाएँ नई पीढ़ी में स्वाध्याय – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com मोबाइल, इंटरनेट और टीवी की दीवानी हो चली नई पीढ़ी हमारी पुरातन व परंपरागत सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं की आभा से दूर होती जा रही है और इसी का परिणाम है कि हम सभी लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा […]
गतांक से आगे…….यदि करने लग जाए तो उनकी किस्मत का सितारा बुलंद हो जाए। एक सवेरे महाराष्ट्र के जलगांव और बुलढाणा जिले के लोगों ने आकाश में एक हेलीकॉप्टर उड़ता हुआ देखा। उसमें से खेतों पर कुछ पाउडर गिराया जा रहा था। पूछने पर पता लगा कि वीपी नाइक की सरकार के कृषि विभाग ने […]
भारत का भूगोल
भारत की स्थिति-भारत एशिया महाद्वीप में दक्षिणी भाग में 8 डिग्री सेल्सियस 4 से 37 डिग्री सेल्सियस 6′ उत्तरी अक्षांश तक फेेला हुआ है। पूर्व में पश्चिम तक यह 68 डिग्री सेल्सियस 7′ से 97डिग्री सेल्सियस 25′ पूर्वी देशांतर तक स्थित है। कर्क रेखा इसके मध्य से गुजरती है। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम तक […]
आज का चिंतन-03/05/2014
असली इंसान नहीं आते औरों के प्रभाव में – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com भगवान ने हर इंसान को बुद्धि दी है और उस न्यूनाधिक बुद्धि का इस्तेमाल कर वह जमाने भर मेंं अपने आपको कहीं न कहीं चला लेता है, कमा खाता है। अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग भी अलग-अलग इंसानों में अलग-अलग […]
ज्योति से ज्योति जगाते चलो
चढ़ते सूर्य को नमस्कार करने की भारतीय परंपरा बहुत प्राचीन है, वैज्ञानिक है। सूर्य आकाश में चढ़कर ही ढंग से प्रकाश फेेलाता है। इसलिए इस साधना के पीछे साधक की भावना है कि मैं भी ऊंचा चढ़कर संसार में अज्ञानांधकार को मिटाने के लिए प्रकाश फेेलाने वाला बनूं। इसलिए वेद ने कहा-उद्यानं ते पुरूष नावयानम्। […]
आज का चिंतन-02/05/2014
ऎसा कुछ करें जो अक्षय हो – डॉ. दीपक आचार्य 9413306077 dr.deepakaacharya@gmail.com व्यष्टि से लेकर समष्टि तक जो कुछ हो रहा है वह क्षय-अक्षय के क्रमिक परिवर्तन से जुड़ा हुआ है। तत्वों के लिहाज से देखें तो क्षय-अक्षय कुछ नहीं होता बल्कि तत्वों के विभिन्न रूपों में रूपान्तरण की ही प्रक्रिया ही है जो कभी […]
263 अपराधी भी जीत गये तो क्या होगा
राकेश कुमार आर्यनई दिल्ली। अपनी बात दो प्रसंगों से आरंभ करते हैं। पहला प्रसंग है शहीदे आजम भगत सिंह का। भगत सिंह अभी बालक ही थे और विद्यालय में अपनी पढ़ाई कर रहे थे। एक दिन वे अपनी कक्षा में विचार मग्न मुद्रा में चुपचाप बैठे थे। तभी उनकी कक्षा का निरीक्षण करने हेतु अधिकारी […]