नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ […]
Month: January 2013
आओ देखें:भारत में ‘सजातीय’ कौन हैंभारत की सांस्कृतिक परंपराओं को समझने जानने और मानने में हमने भारी चूक की है। फलस्वरूप देश में सामाजिक विसंगतियों ने जन्म लेकर अपनी जड़ता में हमें जकड़ लिया है। हमारे देश में बुद्घिजीवी और विधिशास्त्री भी हमारी बहुत सी प्राचीन मान्यताओं को समझने, जानने और मानने में असफल रहे […]
1998 की वह घटना जब इलियास कश्मीरी नाम का आतंकवादी भारतीय सीमा में घुसा और भारत के एक सैनिक की गर्दन काटकर ले गया। बाद में उसे तत्कालीन पाकिस्तानी सैनिक शासक परवेज मुशर्रफ ने इस ‘साहसिक कार्य’ के लिए एक लाख का पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कारगिल युद्घ में कैप्टन सौरभ कालिया की आंखें पाक सैनिकों ने निकाल लीं […]
गीता के दसवें अध्याय का 16वां श्लोक-पृष्ठ 692 दिव्या आत्मविभूतय:, अर्थात भगवान कृष्ण यहां अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं, हे पार्थ! विभूतियों को दिव्या कहने का तात्पर्य है कि संसार में जो कुछ विशेषता दिखायी देती है, वह मूल में दिव्य परमात्मा की ही है, संसार की नही। अत: संसार की विशेषता देखना भोग […]
एक से अधिक व्यक्तियों के जुडऩे से एक परिवार बनता है, परिवारों के मिलने से मोहल्ला, नगर और समाज का निर्माण का होता है। इसी क्रम में कुछ गांवों को मिला कर एक विकास खंड बना है, कुछ विकास क्षेत्रों को मिला कर एक तहसील और कई तहसीलों को मिला कर एक जनपद बना है। […]
गुलामी से छुटकारा
राष्ट्रीय पर्वों पर मदिरालय बंद रखने काजब से सरकार ने कानून बनाया हैतब से लोगों ने पीने का,नया ही ढंग अपनाया है।दो चार रोज पहले, बोतलें ले आते हैं।और समारोह में ही जाम टकराते हैं।।पीते हैं तो क्या, शहीदों को भी देते हैं दुआ।हे भारत के अमर सपूतों, आजादी के अवधूतो।हम तुम्हारे आभारी हूं,क्योंकि तुम्हारे […]
सामाजिक उल्लास का पर्व है पोंगल
अनिता महेचाउत्सव प्रिया: मानवा: यानि मानव उत्सव प्रिय होते हैं। महाकवि कालिदास का यह कथन मानव-स्वभाव पर पूर्णत: लागू होता है क्योंकि पर्वों से हमारे जीवन की एकरसता और नीरसता दूर होती है तथा रोचकता, उल्लास और आनन्द की अभिवृद्धि होती है।लोक जीवन में लाता है उल्लास का ज्वारभारत धार्मिक एवं आध्यात्मिक देश हैं। भारत […]
लालकृष्ण आडवाणी के तेवर लाल
निरंजन परिहारबीजेपी में हड़कंप है। लालकृष्ण आडवाणी अड़ गए हैं। नितिन गड़करी नहीं चलेंगे। संघ परिवार बहुत कोशिश कर रहा है। कोशिश यह कि कैसे भी करके गड़करी को एक बार फिर चला लिया जाए। लेकिन बूढ़ा शेर बिदक गया है। संघ परिवार बहुत सालों से बीजेपी के सिर पर सवार है। पर, गड़करी के […]
धरती है बलिदान की
उन्नीसवीं सदी के आरंभ में एक नवचेतना प्रस्फुटित हुई। शासन की ओर से दमन का विकराल चक्र अपनी तीव्रगति से चल रहा था। उधर देशवासी उस चक्र से अपना पिंड छुड़ाने के प्रयत्न में थे। देश की राजनीति प्रार्थना व याचना से आगे बढ़कर लोकमान्य तिलक के नेतृत्व में दबाव डालने की नीति तक पहुंच […]
गतांक से आगे…सवाई जयसिंह-द्वितीय इनका जन्म 1668 ईं में हुआ। 13 वर्ष की आयु में अंबर के राजा बने। राजा होने के साथ साथ ये अपने समय के प्रसिद्घ ज्योतिषी तथा शिल्पकार भी थे। 1727 में जयपुर नगर बसाया जो स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है। पंडित जगन्नाथ इनके गुरू थे। इन्होंने खगोल शास्त्र से […]