कलकत्ते में पैदा हुए, दिल्ली आई,आई टी से सिविल इंजिनियरिंग मे पढ़ाई की और कुछ दिन तक उत्तर बिहार में रसायन का उद्योग चलाया। लेकिन मन उखड़ा और कुछ अलग करने की धुन लगी तो चले आये मसूरी। पिछले बीस साल से सिद्ध संस्था के माध्यम से मसूरी के आस पास के इलाके में शिक्षा […]
Month: August 2012
द्रोपदी महाभारत की एक आदर्श पात्र है। लेकिन द्रोपदी जैसी विदुषी नारी के साथ हमने बहुत अन्याय किया है। सुनी सुनाई बातों के आधार पर हमने उस पर कई ऐसे लांछन लगाये हैं जिससे वह अत्यंत पथभ्रष्ट और धर्म भ्रष्ट नारी सिद्घ होती है। एक ओर धर्मराज युधिष्ठर जैसा परमज्ञानी उसका पति है, जिसके गुणगान […]
भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य और वेद का राष्ट्र संगठन वेद मानवजाति के लिए सृष्टि के आदि में ईश्वरप्रदत्त संविधान हैं। अत: ऐसा नही हो सकता कि हमारा आज का मानव कृत संविधान तो नागरिकों के मूल कत्र्तव्यों का निरूपण करे और वेद इस विषय पर चुप रहे। वेदों में मानव और मानव समाज के […]
प्राय: देखा गया है कि लोग ज्ञानी शब्द की गंभीरता को नही समझते। यह शब्द ही सारगर्भित है, मौलिक है। जिसका अर्थ बड़ा ही विस्तृत है, व्यापक है और आचरण से जुड़ा हुआ है। जिसकी महिमा बड़ी ही दायित्वपूर्ण है। जो लोग इसे हल्के में लेते हैं, तो लगता है उनका अध्ययन सतही है, ज्ञानी […]
आज राजनीति भ्रष्टाचार की जननी बन चुकी है। भारत के रक्षक ही भारत के भक्षक बन चुके हैं। शासक ही शोषक हो गया है। अंग्रेजों के जाने के पश्चात सत्ता परिवर्तन तो हुआ, किंतु व्यवस्था परिवर्तन नही हो पाया। फलस्वरूप नई बोतल में वही पुरानी शराब चल रही है। इससे पूर्व कि हम विषय पर […]
कोई धर्म राष्ट्रीय धर्म से बड़ा नहीं
अब्दुल रशीदहम एक ऐसे सनसनीखेज़ दौर से गुजऱ रहे हैं जहां बहुत मुमकिन है अफ़वाहों का तेज़ी से बढना। लेकिन यह भी सच है कि इस दौर मे ऐसे तमाम माध्यम उपलब्ध है जिससे अफ़वाहों की हक़ीकत को जाना जा सकता है वो भी चंद मिनटों में। तब कैसे कुछ लोग तबाही का जाल बुनकर […]
मुद्दा परमाणु करार का, या फिर अमरनाथ का मुद्दा।घाटी में घुसपैठ पाक की, बना हुआ स्थाई मुद्दा।। कंधमाल में धर्म हनन का, छाया देश-विदेश में मुद्दा।दुनिया में अब तो हावी है, आतंकी हमलों का मुद्दा।। मुद्दा पानी की किल्लत का, और बाढ़ का भी है मुद्दा।इसका मुद्दा उसका मुद्दा, सबका लूट-खसूट का मुद्दा।। घर का […]
भारतवर्ष एक भौतिक भूखंड ही नही है, वह एक विचार है। भारतवर्ष का अर्थ ही अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक है जो ज्ञान के प्रकाश में लीन रहकर जीवन व्यतीत करता हो, वह भारतवर्ष है। जब हम इसे इंडिया कहते हैं तो उसके पवित्र भाव कहीं दब जाते हैं। युगों युगों तक भारतवर्ष ने विश्व को […]
तनवीर जाफऱीअन्ना हज़ारे व उनके सहयोगियों द्वारा छेड़े गए जनलोकपाल विधेयक संबंधी आंदोलन की ही तरह बाबा रामदेव द्वारा विदेशों में जमा काला धन वापसी के मुद्दे पर छेड़ा गया आंदोलन भी पूरे देश के लिए आकर्षण व चर्चा का केंद्र रहा। इन आंदोलनों की परिणिति क्या हुई अथवा यह आंदोलन सफल रहे या असफल, […]
भारतीय रियासतों का एकीकरण और पटेल
राकेश कुमार आर्य सरदार पटेल का नाम भारत की तत्कालीन 563 रियासतों के भारत में विलीनीकरण के कारण बहुत ही सम्मान से लिया जाता है। उनके लौहपुरूष होने का प्रमाण उनके द्वारा रियासतों को भारतीय संघ में सम्मिलित करने के उनके महान कार्य में देखने को मिला। भारत की स्वतंत्रता में राजशाही का कोई विशेष […]