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पर्व – त्यौहार

ओ३म् “रक्षा बन्धन अन्याय न करने और अन्याय पीढ़ितों की रक्षा करने का संकल्प लेने का पर्व है”

============ प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षा बन्धन का पर्व सभी सुहृद भारतीयों द्वारा विश्व भर में सोत्साह मनाया जाता है। समय के साथ प्रत्येक रीति रिवाज व परम्परा में कुछ परिवर्तन होता रहता है। ऐसा ही कुछ परिवर्तन रक्षा बन्धन पर्व में हुआ भी लगता है। भारत में मुस्लिम काल में […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

ओ३म् “ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज ने देश-धर्म-संस्कृति को क्या योगदान किया?”

============ भारत देश, इसका धर्म वैदिक धर्म एवं वैदिक संस्कृति संसार में प्राचीनतम हैं। संसार में प्रचलित मत-मतान्तरों को तो यह भी पता नहीं है कि संसार की उत्पत्ति कब, किससे, क्यों व कैसे हुई? इन प्रश्नों के उत्तर वैदिक धर्म के अनुयायी आर्यसमाज के सामान्य बन्धु तथा विद्वान सभी जानते हैं। जो मनुष्य धर्म […]

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हमारे क्रांतिकारी / महापुरुष

ओ३म् आज 80वी जन्म तिथि पर –ऋषि दयानन्द जिनके मन व वाणी में वसते थे– “स्वामी दयानन्द के विचारों की देन थे हमारे प्रेरणास्रोत आर्य-विद्वान प्रा. अनूपसिंह”

============ [लेख की भूमिका- हम सन् 1970 व उसके एक दो वर्ष बाद आर्यसमाज के सम्पर्क में आये और सदस्य बने। हमारे सदस्य बनने में मुख्य भूमिका हमारे एक पड़ोसी मित्र श्री धर्मपाल सिंह तथा आर्यसमाज के वरिष्ठ विद्वान प्रा. अनूप सिंह जी की थी। दिनांक 15 अगस्त 2024 को प्रा. अनूपसिंह जी की 80वी […]

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भारतीय संस्कृति

महामहोपाध्याय आर्यमुनि और उनका प्रमाणिक वैदिक साहित्य’

पं. आर्यमुनि (जन्म 1862) का आर्यसमाज के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान है। आर्यसमाज की नई पीढ़ी के अधिकांश लोग इनसे परिचित नहीं है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आज उनका परिचय इस लेख में दे रहे हैं। आपका जन्म पूर्व पटियाला राज्य के रूमाणा ग्राम में सन् 1862 में हुआ था। जन्म का व […]

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आज का चिंतन

ओउम् “गुरूकुल शिक्षा प्रणाली बनाम् स्कूलों में दी जाने वाली वर्तमान शिक्षा”

============= मानव सन्तान को शिक्षित करने के लिए एक पाठशाला या विद्यालय की आवश्यकता होती है। बच्चा घर पर रह कर मातृ भाषा तो सीख जाता है परन्तु उस भाषा, उसकी लिपि व आगे विस्तृत ज्ञान के लिए उसे किसी पाठशाला, गुरूकुल या विद्यालय मे जाकर अध्ययन करना होता है। केवल भाषा से ही काम […]

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धर्म-अध्यात्म

ओ३म् “एक अकेला ईश्वर सृष्टि की उत्पत्ति व पालन कैसे कर सकता है?”

-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। वैदिक धर्मी मानते हैं कि संसार में ईश्वर एक है और वही इस सृष्टि का रचयिता, पालनकर्ता तथा प्रलयकर्ता है। वही ईश्वर असंख्यजीवों के सभी कर्मों का साक्षी होता है तथा उन्हें उनके अनेक जन्म-जन्मान्तरों में सभी कर्मों के सुख व दुःख रूपी फल देता है। एक ईश्वरीय सत्ता के लिये […]

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भारतीय संस्कृति

ओ३म् “ऋषि दयानन्द जी का गुरु विरजानन्द से विद्या प्राप्ति का उद्देश्य व उसका परिणाम”

============= ऋषि दयानन्द ने सच्चे शिव वा ईश्वर को जानने के लिए अपने पितृ गृह का त्याग किया था। इसके बाद वह धर्म ज्ञानियों व योगियों की तलाश कर उनसे ईश्वर के सत्यस्वरूप व उसकी प्राप्ति के उपाय जानने में तत्पर हुए थे। देश के अनेक स्थानों पर वह इस उद्देश्य की पूर्ति में गये […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “ऋषि दयानन्द जी का गुरु विरजानन्द से विद्या प्राप्ति का उद्देश्य व उसका परिणाम”

============= ऋषि दयानन्द ने सच्चे शिव वा ईश्वर को जानने के लिए अपने पितृ गृह का त्याग किया था। इसके बाद वह धर्म ज्ञानियों व योगियों की तलाश कर उनसे ईश्वर के सत्यस्वरूप व उसकी प्राप्ति के उपाय जानने में तत्पर हुए थे। देश के अनेक स्थानों पर वह इस उद्देश्य की पूर्ति में गये […]

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भारतीय संस्कृति

ओ३म् “ऋषि दयानन्द ने मत-मतान्तरों की परीक्षा कर वेदानुकूल  सत्य के ग्रहण का सिद्धान्त दिया”

  –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।   ऋषि दयानन्द ने अपने ज्ञान व ऊहा से वेदों को सृष्टि के आरम्भ में चार ऋषियों को सर्वव्यापक परमात्मा से प्राप्त सत्य ज्ञान के ग्रन्थ स्वीकार किया था। इस सिद्धान्त व मान्यता की उन्होंने डिण्डिम घोषणा की है। इसके पक्ष में उन्होंने उदाहरणों सहित अनेक तर्क युक्त बातें विस्तार […]

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आज का चिंतन

ओ३म् “मनुष्य धर्मानुसार तथा सत्य असत्य को विचार कर ही आचरण करें”

============ परमात्मा ने मनुष्य को सबसे मूल्यवान् वस्तु उसके शरीर में बुद्धि के रूप में दी है। बुद्धि से हम ज्ञान को प्राप्त कर उसके अनुसार आचरण करते है। जिस मनुष्य की बुद्धि जितनी विकसित व शुद्ध होती है, वह उतना ही अधिक ज्ञानी कहा जाता है। सत्य ज्ञान के अनुरूप आचरण करना ही मनुष्य […]

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