देश के लिए सचमुच वह ऐतिहासिक पल थे जब हमने पहली बार 26 जनवरी 1950 को एक गणतंत्र के रूप में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था। उस दिन सारे देश में खुशी का एक अलग ही मंजर था। हम सबने एक साथ, एक दिशा में, एक सोच के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
देश के लिए सचमुच वह ऐतिहासिक पल थे जब हमने पहली बार 26 जनवरी 1950 को एक गणतंत्र के रूप में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था। उस दिन सारे देश में खुशी का एक अलग ही मंजर था। हम सबने एक साथ, एक दिशा में, एक सोच के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लिया […]
राणा रतन सिंह पहुंचे युद्ध क्षेत्र में राणा भीमसिंह के युद्घ में जाने का अभिप्राय था कि आज का सूर्य या तो चित्तौड़गढ़ के पतन को देखेगा या फिर उसके उत्कर्ष को अपने अंक में समाकर अगले दिन के सूर्योदय को इस प्रसन्नतादायक समाचार के साथ सौंप देगा कि भारत की भूमि वीर सपूतों की […]
Dr DK Garg Note -यह आलेख महात्मा बुद्ध के प्रारम्भिक उपदेशों पर आधारित है। ।और विभिन्न विद्वानों के विचार उपरांत है। ये 9 भाग में है। इसको पढ़कर वे पाठक विस्मय का अनुभव कर सकते हैं जिन्होंने केवल परवर्ती बौद्ध मतानुयायी लेखकों की रचनाओं पर आधारित बौद्ध मत के विवरण को पढ़ा है । कृपया […]
रानी पद्मिनी का बलिदान मेवाड़ की वीर भूमि की महानता इसके बलिदानों में छिपी है। यहां के कण-कण में हमारे महान योद्धाओं का बलिदान बोलता है। उनके रक्त से रंगी यह वीर भूमि आज भी हमारे भीतर रोमांच पैदा करने की सामर्थ्य रखती है। 700 वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो जाने के उपरांत भी […]
देश अपने 74वें गणतंत्र दिवस के रंग में रंग गया है। सचमुच यह पावन पर्व हमें अपने स्वतंत्रता सैनानियों और अमर बलिदानियों के उद्यम और पुरूषार्थ का स्मरण कराकर अपने देश के प्रति समर्पित भाव से जीने के लिए प्रेरित करता है। भारत की संस्कृति की महानता का राज ही यह है कि ये हमें […]
रानी पद्मिनी की योजना रानी पद्मिनी को जैसे ही यह समाचार मिला कि अलाउद्दीन खिलजी छल प्रपंच से उनके पति का अपहरण कर ले गया है तो वह तनिक भी निराश नहीं हुई। रानी ने वस्तुस्थिति की जानकारी होते ही तुरंत कूटनीतिक योजना बनाई। रानी रणनीति और कूटनीति में बहुत ही चतुर्थी। उन्होंने बहुत ही […]
मेवाड़ के शासक और नेपाल मेवाड़ के शासक खुमाण सिंह तृतीय ने 878 ई0 से 903 ई0 तक शासन किया। इसके पश्चात कई पीढ़ियों तक मेवाड़ के शासक सामान्य रूप से शासन कार्य चलाते रहे अर्थात उनके द्वारा कोई ऐसा प्रतापी कार्य संपन्न नहीं हुआ जो इतिहास को नई दिशा देने वाला हो या समकालीन […]
ढोल ,गवार, शुद्र, पशु ,नारी – को लेकर जिस प्रकार बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर सिंह के बयान को लेकर इस समय तूफान मचा हुआ है उस के संदर्भ में आप तुलसीदास जी की रामचरित मानस को देखें कि उन्होंने नारी जाति के लिए अन्यत्र भी ऐसी अशोभनीय, धर्मविरूद्घ और नीति विरूद्घ बातें कही हैं […]
रानी पद्मिनी का जौहर ऊपर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मेवाड़ में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण जौहर राणा रतनसिंह के शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय 1303 ई0 में रानी पद्मिनी के नेेतृत्व में किया गया । अलाउद्दीन ने उस समय रानी पद्मिनी को प्राप्त करने के अनेक यत्न किए थे। परंतु अनेक प्रयत्नों के उपरांत भी […]
डॉक्टर अंबेडकर के बारे में यह बात बड़ी प्रमुखता से स्थापित की गई है कि उन्होंने भारत का संविधान बनाया था। जबकि यह बात सिरे से ही गलत है ।जिसे उन्होंने स्वयं ने ही अपने जीवन काल में भरी पार्लियामेंट के भीतर खारिज कर दिया था। वे नहीं चाहते थे कि देश में बाबा छाप […]