महान विजेता महाराणा संग्राम सिंह मेवाड़ के जिन परम प्रतापी महाराणाओं का इतिहास में विशेष और सम्मान पूर्ण स्थान है, उनमें महाराणा संग्राम सिंह का नाम अग्रगण्य है। इनके भीतर देशभक्ति का भाव कूट-कूट कर भरा था। इनका पराक्रम ,शौर्य और साहस समस्त देशवासियों के लिए गर्व और गौरव का विषय है। मेवाड़ के इस […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
महाराणा कुंभा जैसे वीर पराक्रमी और संस्कृति प्रेमी शासक के यहां उदय सिंह जैसा नैतिक मूल्यों से हीन पुत्र जन्मा। जिसने भारतीय इतिहास की उज्ज्वल परंपरा को कलंकित करते हुए अपने पिता की हत्या की। वास्तव में उदा सिंह मेवाड़ के गौरवशाली राजवंश का एक कलंक है। इस शासक को उदय और ऊदा के नाम […]
गुजरात और नागौर के बीच युद्ध गुजरात और नागौर के बीच भी कई युद्ध हुए। 1456 ई0 में सुल्तान कुतुबुद्दीन ने नागौर पर चढ़ाई की परंतु उसको हार का सामना करना पड़ा था। 1457 ई0 में गुजरात और मालवा के सुल्तान चंपानेर नामक स्थान पर मिले और समझौता किया कि मिलकर मेवाड़ पर आक्रमण किया […]
एक अजीब घटना घटित हुई ऐसे वीर पराक्रमी महाराणा मोकल सिंह के जन्म और बचपन की कहानी को भी यहां उद्धृत करना आवश्यक है। उनके जन्म और बचपन की कहानी का उल्लेख कर्नल टॉड ने किया है। वह अपनी पुस्तक राजस्थान का इतिहास भाग – 1 में इस पर प्रकाश डालते हुए लिखते हैं कि […]
महाराणा क्षेत्र सिंह से महाराणा मोकल सिंह तक महाराणा हमीर सिंह के देहांत के पश्चात उनके पुत्र महाराणा क्षेत्र सिंह ने सत्ता भार संभाला। महाराणा हमीर सिंह ने बहुत अधिक सीमा तक मेवाड़ को एक सुव्यवस्थित राज्य में परिवर्तित करने में सफलता प्राप्त की थी। इस प्रकार महाराणा क्षेत्र सिंह को एक सुव्यवस्थित विरासत उत्तराधिकार […]
मालदेव और मेवाड़ की जनता अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ का प्रभार जिस मालदेव को सौंपा था वह भी नई परिस्थितियों पर बड़ी सूक्ष्मता से दृष्टिपात कर रहा था। महाराणा हमीर सिंह के उत्थान से वह भयभीत रहने लगा था। उसे पता था कि उसके शासन को स्थानीय प्रजा जन स्वीकार नहीं करते और वह अपना […]
फिर से चित्तौड़ छीनने वाला महाराणा हमीर सिंह राणा अजय सिंह ने जब अपने भतीजे हमीर सिंह का राजतिलक किया तो उस राजतिलक ने हमीर सिंह के सिर पर कांटों का ताज रख दिया था। जी हां, एक ऐसा ताज जिसे पहन कर रातों को नींद नहीं आ सकती थी और दिन में चैन नहीं […]
कठिनाइयों का दौर और राणा अजय सिंह हम यहां पर यह भी स्पष्ट करना चाहेंगे कि कैलवाड़ा अरावली पर्वत पर बसा हुआ एक नगर है। इस नगर में राणा अजय सिंह अपने दुर्दिनों के उस दौर को काट रहा था। वह उस समय किसी से भी किसी प्रकार की शत्रुता मोल लेने की स्थिति में […]
राजा अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई.) मेवाड़ की भूमि की महानता इसके बलिदानों में है। यही कारण है कि भारत में जब बलिदानों की बात चलती है तो मेवाड़ का नाम सबसे पहले लिया जाता है। भारत की वीर परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में सचमुच मेवाड़ की वीरभूमि का सबसे महत्वपूर्ण योगदान […]
राणा रतन सिंह का बलिदान और मेवाड़ के प्रजाजन भारत के रोमांचकारी इतिहास का यह एक गौरवशाली प्रमाण है कि यहां के वीर वीरांगनाओं ने अपने देश के स्वाभिमान के लिए अपना प्राणोत्सर्ग करने में तनिक भी विलंब नहीं किया। देशभक्त वीर वीरांगनाओं ने सदा देश के मान सम्मान को आगे रखा और बड़े स्वार्थ […]