97 देश ,न्याय ,सत् धर्म से, करो सत्य सरोकार। शुद्धि करके खोजिए, जीवन का आधार।। जीवन का आधार , मनुष्यता खोज रही। दुर्गुणी मनुज दानव होता, इतना ही सोच रही।। सड़ गया व्यक्तित्व , आती दुर्गंध इनके कर्म से । क्या समझे ऐसा मानव, देश, न्याय ,सत धर्म से ? 98 विषधर मजहब होत है, […]
कुंडलियां … 33 विषधर मजहब होत है…….