यदि आपसे पूछा जाए कि देश पहले है या दल पहले है तो आपका उत्तर निश्चित रूप से यही होगा कि देश पहले है। पर राजनीति में इस समय देश से पहले दल हो गया। लोकतंत्र नीतियों का आलोचक है। हो सकता है कि किसी विषय को लेकर आपकी विचारधारा या मत अलग हो और […]
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
यदि आपसे पूछा जाए कि देश पहले है या दल पहले है तो आपका उत्तर निश्चित रूप से यही होगा कि देश पहले है। पर राजनीति में इस समय देश से पहले दल हो गया। लोकतंत्र नीतियों का आलोचक है। हो सकता है कि किसी विषय को लेकर आपकी विचारधारा या मत अलग हो और […]
छोटे नेताओं की छोटी हरकतों, छोटी सोच और संकीर्ण मानसिकता के कारण देश अभी भी अंधेरे में टक्कर मार रहा था। उसे नेता की खोज थी। पर नेता नहीं मिल रहा था। संक्रमण काल की रात्रि अभी और गहराती जा रही थी। अंधकार छंटने का नाम नहीं ले रहा था। ऐसी परिस्थितियों में 16 फरवरी […]
डॉ राकेश कुमार आर्य श्रीरामचन्द्र जी और कृष्णा भगवान के चरित्रों का अध्ययन करने पर एक बात प्रमुखता से सामने आती है कि अपने जीवनकाल में इस दोनों को ही अनेक बार जनता ने ही अपमानित किया। लेकिन उनका अंत किस तरह हुआ, उससे हमें शिक्षा लेनी चाहिए। रावण, कंस और हिरणकश्यप अपवाद को छोड़, […]
पी0वी0 नरसिम्हाराव प्रधानमंत्री के रूप में बहुत अधिक लोकप्रिय नहीं हो पाए थे। वह भीड़ को आकर्षित करने वाले नेता कदापि नहीं थे। उन्होंने देश को एक योग्यतम अधिकारी की भांति आगे बढ़ाने का काम किया। अधिकारी से आगे जाकर नेता बनने की बात उन्होंने कभी सोची भी नहीं। शायद वह जानते थे कि जब […]
विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के पतन के पश्चात जब चंद्रशेखर को कांग्रेस ने अपना मोहरा बनाकर देश का प्रधानमंत्री बनाया तो आरंभ से ही यह स्पष्ट हो गया था कि इस समय नई लोकसभा के चुनाव बहुत निकट हैं । कांग्रेस 1980 के इतिहास को दोहराने की तैयारी कर रही थी, जब इंदिरा गांधी […]
देश उस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। जनता पार्टी के नेताओं की निजी महत्वाकांक्षाओं ने देश को निराश किया था। ऐसे में नए चुनाव संपन्न हो रहे थे। ‘जात पर, न पात पर, इंदिरा तेरी बात पर, मोहर लगेगी हाथ पर….’ यह नारा उस समय देश के जनमानस को छू रहा था। […]
Nehru ji ki jayanti 27 Mai per Vishesh नेहरू जी की जयंती 27 में पर विशेष स्वतंत्रता आंदोलन के काल में हमारे क्रांतिकारी जब भी कोई ‘आतंकी घटना’ कर ब्रिटिश सरकार को हिलाने का प्रशंसनीय कार्य करते थे तभी हमारे कांग्रेसी नेताओं की कंपकंपी छूट पड़ती थी। उस कंपकंपी से मुक्ति पाने के लिए गांधीजी […]
हमारे क्रांतिकारियों ने हर वर्ष की भांति 1933 के प्रारंभ से ही कई स्थानों पर बम विस्फोट कर करके सरकार की नाक में दम कर दिया था। सरकार का उन दिनों वश चलता तो वह एक क्रांतिकारी को भी छोड़ती नही। परंतु क्रांतिकारियों के पीछे जनता जनार्दन का व्यापक समर्थन था, इसलिए सरकार पूर्णत: क्रूर […]
आपातकाल के दौरान जनता पर किए गए अत्याचारों से खिन्न भारत का मतदाता कांग्रेस के विरुद्ध हो चुका था। इंदिरा गांधी ने यद्यपि पांचवी लोकसभा का कार्यकाल 1 वर्ष बढ़ा लिया था परंतु अंत में उन्हें जनमत के सामने झुकना पड़ा और देश में आम चुनाव की घोषणा कर दी गई। 16 से 20 मार्च […]
कांग्रेस में हुए विभाजन के उपरांत इंदिरा गांधी के लिए सत्ता में बने रहना बड़ा कठिन हो रहा था। उन्हें कई प्रकार की चुनौतियां मिल रही थीं। सिंडिकेट उनके लिए सिरदर्द बन चुका था। क्योंकि सिंडिकेट के नेता उनके लिए दिन प्रतिदिन कई प्रकार की चुनौतियां खड़ी करते जा रहे थे। देश की अर्थव्यवस्था को […]