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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

सूर्य के प्रकाश की भांति भारतीय गगनमंडल पर छा गया छत्रसाल

महाराज जनक की आनंदाग्नि राजा जनक अपने दरबार में वेदव्यास जी के साथ गंभीर शांत चर्चा में निमग्न थे। वेदव्यास जी राजा के समक्ष गूढ़ तत्वों की मीमांसा कर रहे थे। बड़ी उत्कृष्ट चर्चा चल रही थी। चारों ओर इतना आनंद था कि मानो अमृत वर्षा हो रही हो। राजा जनक शांतमना उस अमृतवर्षा का […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-58

वायु-जल सर्वत्र हों शुभ गन्ध को धारण किये विश्व स्वास्थ्य संगठन इस समय छोटे-छोटे द्वीपीय देशों के अस्तित्व को लेकर बड़ी कठिन स्थिति में फंसा हुआ है। पर्यावरण असंतुलन की स्थिति से निपटने के लिए आज भी बहुत से देश मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार नहीं हैं। विश्व के अधिकांश देश ऐसे हैं-जिनके पास किसी गंभीर […]

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संपादकीय

साबरमती के संत का चमत्कार – २

क्या उसने इसके उपाय किये हैं या कौन से अन्य उपाय किये जाने उसके पास शेष हैं? यदि उसके पास कुछ शेष है तो उसके विकल्प क्या हैं? हमारी जनता भी अपने राजनीतिज्ञों से ऐसे ही प्रश्न पूछे। उन्हें वास्तविक बिंदुओं पर लाने के लिए वह प्रेरित भी करे और बाध्य भी करे। ‘हवाई फायरों’ […]

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संपादकीय

राष्ट्रघाती मुस्लिम तुष्टिकरण

जो बातें अंग्रेजों के काल में नहीं हो पायीं वे स्वतंत्र भारत में हो गयीं। यथा- नेहरू परिवार की व्यक्ति पूजा परक राजनीति। नेहरू परिवार की मुस्लिम परस्त राजनीति। नरसिम्हाराव के प्रधानमंत्री काल में मस्जिदों के मुल्लाओं का वेतन सरकारी कोष से दिये जाने की घोषणा। सन 1993 ई. में हज के लिए सरकारी सहायता […]

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संपादकीय

लोकतंत्र में आलोचना

लोकतंत्र सचमुच सर्वोत्तम शासन प्रणाली है। इसकी सर्वोत्तमता का कारण यह नहीं है कि यह शासन प्रणाली मताधिकार के माध्यम से जनसाधारण की शासन में सहभागिता सुनिश्चित करती है, अपितु इसकी सर्वोत्तमता का वास्तविक रहस्य इसके द्वारा लोगों को और विशेषत: शासकवर्ग को एक दूसरे की आलोचना, प्रत्यालोचना और समालोचना करने का अधिकार भी देती […]

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राजनीति संपादकीय

साबरमती के संत का चमत्कार

साबरमती के संत का कमाल यही है कि उसकी नीतियों के सहारे लोग आज देश पर शासन करने में सफल हो रहे हैं। यह वास्तव में जनता की भावनाओं से किया गया खिलवाड़ है, जो हर बार और हर स्तर के चुनाव में किया जाता है। केवल भारत ही एक ऐसा देश है-जिसमें चुनाव को […]

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संपादकीय

भारत में राज्य और मुस्लिम महिलाएं-4

इस राष्ट्र के शासक सुधारक नहीं रहे हैं, यह बात सर्वमान्य हो चुकी है। ये सुधारों से डरकर इधर-उधर की बातों से जनता का मन बहलाकर मात्र समय व्यतीत कर रहे हैं। वे क्रांति की ओर हमारा ध्यान आकृष्टï कर रही है। इस क्रांति की रानी लक्ष्मीबाई बनकर, ‘तस्लीमा नसरीन’ और ‘जहांआरा बेगम’ जैसी कई […]

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संपादकीय

भारत में राज्य और मुस्लिम महिलाएं-3

माता निर्माता भवति नारी के प्रति वैदिक आदर्श है ‘माता निर्माता भवति’ अर्थात माता हमारी निर्माता होती है। हमारे भीतर जो संस्कार होते हैं उन पर माता का बड़ा भारी गहरा प्रभाव होता है। अत: नारी समाज को पहले उत्पन्न करती है फिर उसका निर्माण करती है अर्थात उसे उसी प्रकार एक सही सांचे में […]

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भयानक राजनीतिक षडयंत्र संपादकीय

भारत में राज्य और मुस्लिम महिलाएं-2

किसी का साहस नहीं होता जो इस पाशविक प्रवृत्ति के विरूद्घ संसद में अपना मुंह खोल सके। जहां नारी (न+आरि=नारि अर्थात जिसका कोई शत्रु न हो) का समाज इतना भारी शत्रु हो कि उसके सतीत्व को, अस्मिता को, खुल्लम खुल्ला नीलाम कर रहा हो, अथवा उसे अपनी हवश और वासना की पूत्र्ति का साधन मात्र […]

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मुद्दा राजनीति संपादकीय

इस्लामिक देश और इस्लाम

विश्व की कुल जनसंख्या में प्रत्येक चार में से एक मुसलमान है। मुसलमानों की 60 प्रतिशत जनसंख्या एशिया में रहती है तथा विश्व की कुल मुस्लिम जनसंख्या का एक तिहाई भाग अविभाजित भारत यानि भारत, पाकिस्तान और बंगलादेश में रहता है। विश्व में 75 देशों ने स्वयं को इस्लामी देश घोषित कर रखा है। पर, […]

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