हिंदी हमारी राजभाषा है। पर वास्तव में राजभाषा अभी तक अंग्रेजी ही है। देश के सभी उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालय की भाषा तो पूर्णत: अंग्रेजी है। इन सभी न्यायालयों में वादों की सुनवाई और आदेशों का निष्पादन अंग्रेजी में ही होता है। अब इस प्रकार के न्यायालयों के अंग्रेजी मोह को समाप्त करने के […]
Author: डॉ॰ राकेश कुमार आर्य
लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है
लुटेरों को राज्यसिंहासन और वास्तविक उत्तराधिकारियों को वनवास दिलाना भारतीय प्रचलित इतिहास का सबसे घातक छल प्रपंच है। जिन इतिहास लेखकों ने इस राष्ट्र अपघात को करने में किसी भी प्रकार से सहयोग दिया है वे सभी ‘मंथरा’ की भूमिका में हैं। महमूद गजनवी का लुटेरा व्यक्तित्व भी भारत के लिए ऐसा ही है, जिसे यहां […]
एक समय था जब कांग्रेसी होना सचमुच गर्व की बात समझी जाती थी। निश्चित रूप से यह वो समय था जब कांग्रेस में गांधी, सरदार पटेल, लालबहादुर शास्त्री, कामराज, जेपी नारायण, जैसे अनगिनत लोग निचले पायदान से चढ़कर ऊपर आए थे और जो गरीब की गरीबी को नजदीक से जानते थे। क्योंकि उन्होंने गरीबी को […]
महर्षि दयानंद जी महाराज ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश के ग्यारहें समुल्लास में आर्य राजाओं की वंशावली दी है। जिसे हम यहां यथावत देकर तब उस पर विचार करेंगे कि इस वंशावली को देने के पीछे महर्षि का मन्तव्य क्या था और हमने उस मन्तव्य को समझा या नही? :- आर्यावर्त्तदेशीय राज्यवंशावली इंद्रप्रस्थ के आर्य लोगों ने श्रीमन्तमहाराज यशपाल […]
गंगा यमुना में पानी की रफ्तार बढ़ी हुई है-मौसम बाढ़ का है। समय की रफ्तार भी तेज हो रही है-मौसम चुनावों (2014) का है। सही इसी समय न्यायालयों के निर्णयों की रफ्तार भी तेज हो रही है-मौसम सुधारों का है… शायद। पिछले दिनों न्यायालयों ने कई ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय दिये हैं कि जिनके अवलोकन से भारतीय […]
धर्म की बड़ी विस्तृत परिभाषा है। इसके विभिन्न स्वरूप हैं। संसार की सबसे प्यारी चीज का नाम है-धर्म। आप सड़क पर चले जा रहे हैं, किसी की अचानक दुर्घटना हो जाती है, आप रूकते हैं, और अपने आप ही उधर सहायता के लिए दौड़ पड़ते है। सहायता के लिए आपके हृदय में करूणा उमड़ी-इस प्रकार […]
स्वामी विवेकानंद और योगी अरविंद का मत रहा है कि भारत की शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य अपने देश की विरासत की आध्यात्मिक महानता पर बल देना और उसे बनाए रखने के लिए हमारे दायित्व के निर्वाह पर बल देना होना चाहिए, जिससे हम विश्व को प्रकाश का मार्ग दिखा सकें। यदि आध्यात्मिकता भारत से लुप्त […]
लोकतंत्र में प्रमुख रूप से द्वीदलीय व्यवस्था होती है। इसमें एक सत्तापक्ष होता है तो दूसरा विशेष पक्ष, अर्थात वह पक्ष जो सत्तापक्ष की नीतियों की विशेष पड़ताल करे और राष्ट्रहित में यथावश्यक संशोधन प्रस्तुत कर नीति या किसी विधेयक को राष्ट्रोचित बनाने में विशेष सहयोग करे। स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियाद ही ये सोच है […]
भारत का संविधान कहीं भी ये घोषणा नही करता कि जब आम चुनाव हों तो किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को अपना भावी पी.एम. पहले ही घोषित कर देना चाहिए। संविधान इस विषय में यही व्यवस्था देता है कि देश का प्रधानमंत्री वही होगा जिसे देश की संसद के निचले सदन में निर्वाचित सदस्यों […]
एक आंकलन के अनुसार अगले 50 वर्षों में ओजोन परत में हो रहे निरंतर क्षरण के कारण विश्व में त्वचा कैंसर के फैलने की प्रबल आशंका है। पर्यावरणविदों ने इस कैंसर के फैलने की आशंका शीतोष्ण जलवायु के उन क्षेत्रों में सबसे अधिक मानी है, जहां ओजोन की परत पतली है, स्पष्ट है यूरोपीय देश […]