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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-13

गीता के दूसरे अध्याय का सार और गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-13आत्मा को नहीं होत है, सुख, दु:ख का कभी भान। द्वन्द्व सताते देह को बात वेद की जान।। हमारे देश के भी बड़े-बड़े विद्वानों तक को ऐसी भ्रांति रही है। आज के संसार के लोगों की तो यह प्रमुख समस्या है […]

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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

औरंगजेब के सामने भी सुरक्षित रखा था शिवाजी ने स्वाभिमान

शिवाजी के पत्र का जयसिंह पर नही पड़ा कोई प्रभाव हमने पिछले आलेख में शिवाजी के उस पत्र को उल्लेखित किया था, जो उन्होंने जयपुर के राजा जयसिंह के लिए लिखा था। उस पत्र के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि शिवाजी मराठाभक्त नहीं हिंदू और हिंदूस्थान के भक्त थे। पर दुर्भाग्य की बात […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-77

नाथ करूणा रूप करूणा आपकी सब पर रहे गतांक से आगे…. संसार के किसी न्यायाधीश से जब कोई व्यक्ति स्वयं को आहत मानता है तो वह दया की भीख इसीलिए मांगता है कि दण्ड अपेक्षा से अधिक कठोर हो गया है-उसे दयालुतापूर्ण कर लिया जाए। न्यायिक प्रक्रिया में फिर भी कहीं कोई दोष त्रुटि या […]

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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

जब शिवाजी ने लिखा था जयसिंह को देशभक्ति भरा पत्र

भारत के राष्ट्रनायकों और इतिहास पुरूषों के साथ जो अन्याय हमारे इतिहासकारों और आज तक के दुर्बल नेतृत्व ने किया है, संभवत: उसी के विषय किसी कवि ने कितना सुंदर कहा है- ”धरती की सुलगती छाती के बेचैन शरारे पूछते हैं, जो लोग तुम्हें दिखला न सके, वो खून के धारे पूछते हैं अंबर की […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-76

नाथ करूणा रूप करूणा आपकी सब पर रहे गतांक से आगे…. ऋग्वेद (3 / 18 / 1) के मंत्र की व्याख्या करते हुए स्वामी वेदानंद तीर्थ जी अपनी पुस्तक ‘स्वाध्याय संदोह’ में लिखते हैं कि- ‘हे ज्ञान दान निपुण! अग्रगन्त:! आदर्श ! ज्ञान विज्ञान की खान ! प्रकाशकों के प्रकाश ! परम प्रकाशमय! अज्ञानान्धकार विनाशक […]

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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-12

गीता के दूसरे अध्याय का सार और संसार गीता और शहादत अपनी मजहबी मान्यताओं को संसार पर बलात् थोपने वाले जिहादियों को लालच दिया गया है कि यदि ऐसा करते-करते तुम मृत्यु को प्राप्त हो जाते हो तो तुम शहीद कहे जाओगे। जबकि श्रीकृष्ण जी अर्जुन से इसके ठीक विपरीत बात कह रहे हैं। गीताकार […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से मुद्दा राजनीति

सरकार के ‘स्वच्छता अभियान’ में खामियां

हमारे देश को प्रयोगशाला बनाकर नये-नये प्रयोग करते जाने की राजनीतिज्ञों की पुरानी परम्परा है। जब किसी प्रयोग पर करोडों-अरबों रूपया व्यय हो जाता है तो फिर उसे भुला दिया जाता है या जब उस प्रयोग के गलत परिणाम राजनीतिज्ञों को मिलने लगते हैं तो उन्हें जनता को न बताकर चुपचाप उस योजना को ही […]

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पूजनीय प्रभो हमारे……

पूजनीय प्रभो हमारे……भाग-75

हाथ जोड़ झुकाये मस्तक वन्दना हम कर रह्वहे गतांक से आगे…. कथावाचकों की फीस लाखों में पहुंच गयी है। धर्म और प्रवचन बेचे जा रहे हैं। उनके माध्यम से अश्लीलता परोसी जा रही है। ‘इदन्नमम्’ का सार्थक व्यवहार समाप्त हो गया है, जिससे लोभवृत्ति में वृद्घि हो गयी है, झूठे अहम् को लेकर लड़ाई झगड़े […]

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संपूर्ण भारत कभी गुलाम नही रहा

शिवाजी ने आत्मरक्षा में ही अफजल का वध किया था

देशद्रोही राजा चंद्रराव और शिवाजी शिवाजी राजा चंद्रराव की दूषित और राष्ट्रद्रोही मानसिकता से क्षुब्ध रहने लगे। षडय़ंत्रों और छल कपट से भरी उस समय की राजनीति में कुछ भी संभव था, इसलिए शिवाजी राजा चंद्रराव की राष्ट्रद्रोही मानसिकता के प्रति मौन तो थे पर असावधान किंचित भी नही थे। वह जानते थे कि राष्ट्रद्रोही […]

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डॉ राकेश कुमार आर्य की लेखनी से विश्वगुरू के रूप में भारत

विश्वगुरू के रूप में भारत-64

उपरोक्त लेखक आगे लिखते हैं कि-”रोम में कैथोलिकों की जनसंख्या लगभग पच्चीस लाख (1978 में) है। यहां प्रतिवर्ष सत्तर नये पादरी निर्माण किये जाते थे। जब 1978 में लुसियानी (जॉन पॉल प्रथम) पोप बने तब मात्र छह पादरी ही निर्माण होते थे। वस्तुत: शहर के अधिकांश क्षेत्रों में पैगन (अर्थात मूत्र्तिपूजक हिन्दू लोग) भरे थे […]

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