देश के जननायक नहीं धन के नायक लोग । धर्म से निरपेक्ष हैं,महामारी का रोग।।35।। देशहित नहीं बोलते,करें स्वार्थ की बात। गिद्ध देश में पल रहे, नोंच रहे दिन रात।।36।। राष्ट्रीयता की बात कर, राष्ट्रधर्म से है दूर । सबके हित कुछ ना करें ,स्वार्थ में गये डूब॥37॥ देश को आंख दिखा रहे […]