कविता — 9 प्रकृति बन रूपसी आई लेकर अपना सुंदर संदेश। सूर्य की लाली ने उसका ग्रहण किया सारा उपदेश।। प्रकृति की सुंदर साड़ी पर जब फैली सूरज की लाली। कल-कल करती नदिया बोली मुझको दे दो मस्ती मतवाली।। पुष्पों के ऊपर उड़ते भृमर लगे सुनाने अपना राग। कोयल कू – कू करके कहती अब […]
रूप अनेकों धरती प्रकृति …..