कविता – 22 धर्म पुजारी है प्रेम का …… मजहब कारण विनाश का बात बांध लो गांठ। धर्म प्रतीक विकास का दे मानवता का पाठ।।1।। धर्म की दृष्टि दिव्य है दिव्य धर्म का तेज। मनुष्यता बिना धर्म के हो जाती निस्तेज।।2।। मजहबी अपराध से भरा पड़ा इतिहास। दानवता बनकर किया मानवता का नाश।।3।। मजहबी चिंतन […]
धर्म पुजारी है प्रेम का ……